विकट संकष्टी चतुर्थी 2025: गणेश जी की कृपा पाने का सबसे शक्तिशाली दिन | जानिए पूरी जानकारी | 2YoDo विशेष

हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है, लेकिन विकट संकष्टी चतुर्थी तो और भी खास मानी जाती है। यह दिन भगवान गणेश की कृपा पाने और जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने का सर्वोत्तम अवसर प्रदान करता है। क्या आप जानते हैं कि विकट संकष्टी चतुर्थी क्यों इतनी महत्वपूर्ण है? 

इस दिन कौन-से शुभ योग बन रहे हैं? और कैसे करें पूजा ताकि गणपति बप्पा प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएँ पूरी करें?

    इस लेख में हम आपको विकट संकष्टी चतुर्थी की पूरी जानकारी देंगे, जिसमें व्रत विधि, शुभ मुहूर्त, पूजा के मंत्र और इसका धार्मिक महत्व शामिल है।

    विकट संकष्टी चतुर्थी क्या है?

    हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। लेकिन वैशाख मास की संकष्टी चतुर्थी को “विकट संकष्टी चतुर्थी” कहा जाता है, जो विशेष फलदायी मानी जाती है।

    क्यों है यह दिन खास?

    • इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सभी संकट दूर होते हैं।
    • व्यापारियों के लिए विशेष लाभकारी – धन-समृद्धि में वृद्धि होती है।
    • कर्ज से मुक्ति और शत्रुओं पर विजय मिलती है।
    • विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं।
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    विकट संकष्टी चतुर्थी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त

    इस साल विकट संकष्टी चतुर्थी 16 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी।

    मुख्य तिथि व समय:

    • चतुर्थी तिथि आरंभ: 16 अप्रैल, दोपहर 01:16 बजे
    • चतुर्थी तिथि समाप्त: 17 अप्रैल, दोपहर 03:23 बजे
    • उदया तिथि के अनुसार व्रत: 16 अप्रैल

    पूजा का शुभ मुहूर्त:

    • प्रातःकाल पूजा: 07:22 AM – 09:01 AM
    • सायंकाल पूजा: 06:54 PM – 08:15 PM
    • अमृत काल (सर्वश्रेष्ठ समय): 07:22 PM – 09:01 PM

    विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन बन रहे हैं ये शुभ योग

    इस बार विकट संकष्टी पर कुछ अत्यंत शुभ योग बन रहे हैं, जो पूजा का फल बढ़ा देते हैं:

    1. सर्वार्थ सिद्धि योग: सभी मनोकामनाएँ पूरी करने वाला।
    2. अमृत सिद्धि योग: कार्यों में सफलता और शुभता लाता है।
    3. भद्रावास योग: विशेष परिस्थितियों में शुभ फलदायी।
    4. शिववास योग: भगवान शिव की कृपा से पूजा का फल तुरंत मिलता है।

    विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत की पूजा विधि

    सुबह की तैयारी

    1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
    2. लाल या पीले कपड़े पर गणेश जी की मूर्ति/चित्र स्थापित करें।
    3. सुपारी को गणेश रूप में पूजें (यदि मूर्ति न हो)।

    पूजा विधि

    1. पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें।
    2. सिंदूर, चंदन, फूल, दूर्वा और मोदक अर्पित करें।
    3. “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
    4. शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें और आरती करें।

    विशेष उपाय

    • 21 दूर्वा गणेश जी को अर्पित करने से धन लाभ होता है।
    • गुड़ और चना का दान करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है।

    विकट संकष्टी चतुर्थी का महत्व

    • गणेश जी की कृपा से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
    • व्यापार में तरक्की और नौकरी में प्रमोशन मिलता है।
    • कुंडली के सभी दोष दूर होते हैं।
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    विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखकर भगवान गणेश की आराधना करने से जीवन की सभी समस्याएँ दूर हो जाती हैं। इस दिन पूरे विधि-विधान से पूजा करके मनचाहा फल प्राप्त किया जा सकता है।

    “विघ्नहर्ता गणेश आपके सभी संकट हरें, सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दें!”

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