एक नए अध्ययन में पता चला है कि 15 मिलियन से 6 मिलियन वर्ष पहले महासागरीय क्रस्ट उत्पादन (ocean crust production) में भारी गिरावट आई, जिसके कारण समुद्र स्तर 26 से 32 मीटर तक कम हो गया। यह कमी इतनी अधिक थी कि यदि आज पूर्वी अंटार्कटिक बर्फ की चादर (East Antarctic Ice Sheet) पूरी तरह पिघल जाए, तो समुद्र का स्तर लगभग इतना ही बढ़ सकता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि महासागरीय बेसिन (ocean basin) के आकार में परिवर्तन करने वाली भूगर्भीय प्रक्रियाएँ (geological processes) इस बदलाव की प्रमुख वजह थीं।
अध्ययन के अनुसार, समुद्र तल फैलाव (seafloor spreading) की धीमी गति ने महासागरों को गहरा बना दिया, जिससे वैश्विक समुद्र स्तर (global sea level) में महत्वपूर्ण कमी आई।
महासागरीय बेसिन गहराई और टेक्टोनिक गतिविधियाँ
Geochemistry, Geophysics, Geosystems पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, महासागरीय क्रस्ट उत्पादन में 35% की गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण समुद्री तल फैलाव की गति का धीमा होना (reduced seafloor spreading rate) था।
शोधकर्ताओं ने गणना की कि इस गिरावट के कारण महासागरीय बेसिन अधिक गहरे हो गए, जिससे समुद्र स्तर में 26 से 32 मीटर तक की कमी आई। अध्ययन में विभिन्न प्रारंभिक स्थितियों को ध्यान में रखा गया ताकि समुद्र स्तर में इस गिरावट की सटीकता सुनिश्चित की जा सके।
महासागर की गर्मी और रासायनिक संरचना पर प्रभाव
अध्ययन में पाया गया कि मेंटल (mantle) से महासागर में गर्मी स्थानांतरण (heat transfer) 8% तक कम हो गया। इसके अलावा, महासागरीय पर्वतीय श्रृंखलाओं (oceanic ridges) के पास हाइड्रोथर्मल प्रवाह (hydrothermal flux) में 35% की कमी देखी गई।
ये परिवर्तन महासागरीय रसायनशास्त्र (ocean chemistry) को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों (marine ecosystems) पर गहरा असर पड़ सकता है।
इस शोध के निष्कर्ष न्यू जर्सी (New Jersey) और नोवा स्कोटिया (Nova Scotia) की तटीय चट्टानों से प्राप्त भूवैज्ञानिक आंकड़ों (geological data) से मेल खाते हैं, जिससे समुद्र स्तर में इस महत्वपूर्ण गिरावट की पुष्टि होती है।
क्या महासागरीय क्रस्ट उत्पादन में गिरावट से पृथ्वी ठंडी हुई?
पिछले शोधों के अनुसार, महासागरीय क्रस्ट उत्पादन की गति धीमी होने से ज्वालामुखीय गतिविधियों (volcanic activity) के कारण उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसों में कमी आई।
यदि ऐसा हुआ, तो यह वैश्विक जलवायु के ठंडा होने (global cooling) का एक कारण हो सकता है।
इसके अलावा, अध्ययन यह भी बताता है कि समुद्र की सतह का तापमान घटने और बर्फ की चादरों के फैलने से समुद्र स्तर 60 मीटर से अधिक कम हो सकता था।
इस खोज के संभावित प्रभाव
- समुद्र स्तर परिवर्तन की समझ: महासागरों की गहराई में बदलाव और टेक्टोनिक गतिविधियों के कारण समुद्र स्तर में उतार-चढ़ाव की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी।
- जलवायु परिवर्तन पर प्रभाव: महासागरों से निकलने वाली गर्मी और हाइड्रोथर्मल प्रवाह में गिरावट से जलवायु पर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे यह समझने में मदद मिलेगी कि भविष्य में पृथ्वी के तापमान में क्या परिवर्तन हो सकते हैं।
- समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर असर: समुद्र की गर्मी और रसायन में परिवर्तन से समुद्री जीवों और पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ सकता है।
- भूवैज्ञानिक समयरेखा का विश्लेषण: महासागरीय क्रस्ट उत्पादन में गिरावट और समुद्र स्तर में परिवर्तन के बीच संबंध समझने से पृथ्वी की भूगर्भीय समयरेखा (geological timeline) को अधिक स्पष्टता मिल सकती है।
अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि 15 मिलियन से 6 मिलियन वर्ष पहले महासागरीय क्रस्ट उत्पादन में 35% गिरावट आई, जिससे महासागरीय बेसिन गहरे हुए और समुद्र स्तर में 26 से 32 मीटर तक की कमी आई।
इसके अलावा, महासागरों में ऊष्मा प्रवाह (heat flow) और हाइड्रोथर्मल गतिविधियों (hydrothermal activity) में भी महत्वपूर्ण कमी आई, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और जलवायु पर प्रभाव पड़ा।
यह खोज यह भी बताती है कि महासागरीय क्रस्ट उत्पादन और ज्वालामुखी गैसों के उत्सर्जन की दर में कमी से पृथ्वी का जलवायु ठंडा हो सकता है और समुद्र स्तर में और गिरावट आ सकती है।



