हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। हर त्रयोदशी तिथि को आने वाला यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम माना गया है। जब यह व्रत मंगलवार को पड़ता है, तब इसे ‘भौम प्रदोष व्रत’ कहा जाता है। ‘भौम’ शब्द का संबंध मंगल ग्रह से होता है, और इस दिन की पूजा विशेष रूप से ऋण मुक्ति, स्वास्थ्य लाभ और पारिवारिक कल्याण के लिए की जाती है।
सावन का महीना वैसे भी शिवभक्तों के लिए अत्यंत प्रिय होता है। इस माह में आने वाला भौम प्रदोष व्रत इसलिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इस समय की गई पूजा का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।
भौम प्रदोष व्रत की तिथि व मुहूर्त
- तिथि आरंभ: 22 जुलाई 2025, सुबह 07:05 बजे से
- तिथि समाप्ति: 23 जुलाई 2025, सुबह 04:39 बजे तक
- प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: 22 जुलाई 2025 को शाम 07:18 बजे से रात 09:22 बजे तक
प्रदोष काल में की गई पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। यही वह समय है जब भगवान शिव कैलाश से धरती पर विचरण करने आते हैं और भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।
भौम प्रदोष व्रत की पूजा विधि
- स्नान व संकल्प: सुबह उठकर स्नान करें, व्रत का संकल्प लें।
- धार्मिक स्थल या घर में शिवलिंग की स्थापना करें।
- अभिषेक करें: जल, दूध, दही, घी, शहद व शक्कर से शिवलिंग को स्नान कराएं।
- पूजन सामग्री अर्पित करें: बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प, चंदन, पंचामृत आदि।
- मंत्र जाप करें: ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
- आरती करें: शिव आरती और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- प्रदोष व्रत कथा का श्रवण करें।
- दान-पुण्य: व्रत के अंत में अन्न, वस्त्र, दक्षिणा, फल आदि का दान करें।
प्रदोष व्रत की सामग्री
- दूध, पंचामृत, गंगाजल
- सफेद चंदन, धतूरा, बेलपत्र
- सफेद मिठाई, फल, पंचमेवा
- शिवलिंग, दीपक, अगरबत्ती
- पूजा आसन, पीला व सफेद वस्त्र
- प्रदोष व्रत कथा की पुस्तक
- शिव चालीसा, शंख, कलावा
भौम प्रदोष व्रत का महत्व
- इस व्रत से कर्ज से मुक्ति मिलती है।
- बीमारियों से छुटकारा और शारीरिक आरोग्यता प्राप्त होती है।
- पारिवारिक कलह समाप्त होती है और सुख-शांति का वातावरण बनता है।
- मंगल दोष को शांत करने में सहायक।
- शिव कृपा से जीवन में स्थायित्व और उन्नति प्राप्त होती है।
विशेष रूप से जिन लोगों पर मंगल ग्रह की अशुभ दृष्टि हो या जो बार-बार दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हों, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी है।
इन बातों का रखें ध्यान
- व्रत के दिन तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- काले वस्त्र न पहनें।
- नकारात्मक सोच और वाद-विवाद से बचें।
- पूजा स्थान और घर को साफ-सुथरा रखें।
- व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें।
प्रदोष व्रत कथा का संक्षिप्त सारांश
एक बार देवताओं और असुरों में भयंकर युद्ध हुआ। इस युद्ध में असुरों ने देवताओं को पराजित कर दिया। देवताओं ने भगवान शिव की शरण ली। शिवजी ने प्रदोष काल में प्रसन्न होकर देवताओं को विजय दिलाई। तभी से प्रदोष काल में शिव पूजन का महत्व माना गया है।
भौम प्रदोष व्रत और ज्योतिषीय लाभ
- मंगली दोष से पीड़ित जातकों को लाभ होता है।
- विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
- शत्रु बाधा और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिलती है।
- अंगारक योग की अशुभता समाप्त होती है।
भौम प्रदोष व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर पर संतुलन लाने का भी एक सशक्त माध्यम है।
विशेषकर सावन महीने में किया गया यह व्रत कई गुणा पुण्यदायी होता है। यदि श्रद्धा और विधिपूर्वक यह व्रत किया जाए, तो भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है।



