सावन मास की शिवरात्रि का महत्व अन्य शिवरात्रियों से कहीं अधिक बढ़ जाता है क्योंकि यह महीना स्वयं भगवान शिव को अति प्रिय है। जब सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि आती है, तब शिवभक्त पूरे दिन उपवास रखकर, रात में शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं।
यह पर्व न केवल आस्था का, बल्कि आत्मशुद्धि, मनोकामना पूर्ति और आध्यात्मिक उत्थान का पर्व भी है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन शिव और पार्वती का दिव्य मिलन हुआ था। इसीलिए इस दिन का विवाह योग्य स्त्रियों और पुरुषों के लिए विशेष महत्व होता है।
शुभ मुहूर्त और पूजा समय
सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि इस वर्ष 23 जुलाई 2025 को मनाई जा रही है।
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 23 जुलाई को सुबह 04:39 बजे
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 24 जुलाई को देर रात 02:28 बजे
- निशीथ काल पूजन मुहूर्त: 23 जुलाई रात 12:07 बजे से 12:48 बजे तक
- प्रदोष काल पूजन मुहूर्त: 07:17 PM से 09:53 PM तक
- द्वितीय प्रहर: 09:53 PM – 12:28 AM
- तृतीय प्रहर: 12:28 AM – 03:03 AM
कैसे करें सावन शिवरात्रि की पूजा? (पूजन विधि)
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और शुद्ध वस्त्र धारण करें।
- व्रत का संकल्प लेकर शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।
- बेलपत्र, भस्म, धतूरा, सफेद चंदन, भांग, पुष्प, फल अर्पित करें।
- “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से करें।
- दीपक और धूप जलाकर शिवजी की आरती करें।
- प्रदोष काल और निशा काल में भी शिव की विशेष पूजा करनी चाहिए।
विशेष योग: हर्षण और भद्रावास
इस वर्ष सावन शिवरात्रि पर हर्षण योग और भद्रावास का संयोग बन रहा है, जो इस व्रत की पुण्यगुणा को कई गुना बढ़ा देता है।
- हर्षण योग: दोपहर 12:35 PM से
- भद्रावास योग: दोपहर 03:31 PM तक (भद्रा स्वर्ग में)
इन योगों में शिव-पार्वती की पूजा करने से साधक को दोगुना पुण्य और मनोकामना पूर्ति का विशेष फल प्राप्त होता है।
व्रत का फल और धार्मिक मान्यता
- यह व्रत आयु, आरोग्य, वैवाहिक सुख, संतान सुख, आर्थिक समृद्धि प्रदान करता है।
- कर्जमुक्ति और नकारात्मक ग्रह दोष दूर करने के लिए यह दिन अत्यंत फलदायक माना गया है।
- विवाहित स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति के लिए व्रत करती हैं।
सावधानियां जो रखें जरूरी
- व्रतधारी को सात्विक भोजन करना चाहिए।
- लहसुन, प्याज, तामसिक भोजन, क्रोध और द्वेष से दूर रहें।
- शिवरात्रि के दिन मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहने का प्रयास करें।
यह पर्व पूरे भारत में विशेषकर काशी, उज्जैन, हरिद्वार, केदारनाथ, त्र्यंबकेश्वर, और सोमनाथ जैसे पवित्र शिवधामों में विशेष उल्लास और श्रद्धा से मनाया जाता है।



