भारत में मीडिया उपभोग का तरीका बीते कुछ वर्षों में तेज़ी से बदला है और इसका सबसे बड़ा असर पारंपरिक टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग पर दिखाई दे रहा है। दर्शक अब तय समय पर टीवी देखने के बजाय अपनी सुविधा के अनुसार मोबाइल, स्मार्ट टीवी और OTT प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट देखना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
इसी बदलते ट्रेंड का परिणाम है कि पिछले तीन वर्षों में करीब 50 टीवी चैनलों ने अपने ब्रॉडकास्टिंग लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं। यह जानकारी इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में सामने आई है, जो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है।
यह घटनाक्रम केवल छोटे या क्षेत्रीय चैनलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भारत के सबसे बड़े और प्रभावशाली मीडिया समूह भी शामिल हैं। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि भारतीय टीवी इंडस्ट्री एक बड़े संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रही है।
बड़े ब्रॉडकास्टर्स भी पीछे हटे
रिपोर्ट के अनुसार JioStar, Zee Entertainment Enterprises, TV Today Network, ABP Network और Eenadu Television जैसे बड़े मीडिया हाउस भी उन ब्रॉडकास्टर्स में शामिल हैं, जिन्होंने अपने कुछ टीवी चैनलों के लाइसेंस वापस किए हैं।
यह कदम बताता है कि प्रतिस्पर्धा केवल कंटेंट की नहीं, बल्कि वितरण के माध्यमों की भी हो चुकी है। जहाँ पहले टीवी हर घर का प्रमुख माध्यम था, वहीं अब दर्शकों का बड़ा हिस्सा डिजिटल स्क्रीन पर शिफ्ट हो चुका है। इस बदलाव ने विज्ञापन रेवेन्यू और सब्सक्रिप्शन मॉडल दोनों पर सीधा असर डाला है।
Sony की पैरेंट कंपनी का ऑपरेशनल रिस्ट्रक्चरिंग कदम
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि Sony Pictures Networks India की पैरेंट कंपनी Culver Max Entertainment ने मंत्रालय की अनुमति के बाद 26 डाउनलिंकिंग परमिशन सरेंडर कीं। हालांकि, इसका अर्थ चैनलों को पूरी तरह बंद करना नहीं है। कंपनी ने चयनित चैनलों को दोबारा अपलिंक और डाउनलिंक करने का फैसला लिया है।
इंडस्ट्री विशेषज्ञ इसे संकट के बजाय एक ऑपरेशनल रिस्ट्रक्चरिंग मानते हैं, जिसमें कंपनियाँ अपने खर्च, तकनीकी ढांचे और चैनल पोर्टफोलियो को नए दौर के हिसाब से ढाल रही हैं।
संकट नहीं, बल्कि रणनीतिक फैसला
मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि लाइसेंस लौटाने का फैसला किसी तात्कालिक आर्थिक संकट का नतीजा नहीं है। यह एक सोचा-समझा रणनीतिक निर्णय है, जो बदलते बाजार हालात, घटती टीवी व्यूअरशिप और बढ़ती ऑपरेटिंग लागत को ध्यान में रखकर लिया गया है।
टीवी विज्ञापन से होने वाली आय पर पहले ही दबाव है, वहीं कंटेंट प्रोडक्शन, सैटेलाइट ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कंपनियाँ उन चैनलों को बंद या मर्ज कर रही हैं, जिनकी कमाई लागत के अनुपात में संतोषजनक नहीं है।
OTT और कनेक्टेड टीवी की ओर दर्शकों का झुकाव
भारत में शहरी और संपन्न वर्ग के दर्शक तेजी से OTT प्लेटफॉर्म्स और कनेक्टेड टीवी की ओर बढ़ रहे हैं। ऑन-डिमांड कंटेंट, बिना विज्ञापन या कम विज्ञापन वाला अनुभव और पर्सनलाइज्ड सिफारिशें OTT को टीवी के मुकाबले ज्यादा आकर्षक बनाती हैं।
दूसरी ओर, कीमत को लेकर संवेदनशील घरों में DD Free Dish की लोकप्रियता बढ़ रही है। इससे निजी DTH कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो गई है, क्योंकि उन्हें सब्सक्रिप्शन फीस और चैनल पैकेज की कीमतों को लेकर लगातार संतुलन बनाना पड़ता है।
DTH सेक्टर की बिगड़ती तस्वीर
Crisil की 11 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय निजी DTH कंपनियों की आमदनी में गिरावट का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है। हालांकि, गिरावट की रफ्तार कुछ हद तक धीमी होने की संभावना है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो:
- FY19 में DTH सब्सक्राइबर बेस 7.2 करोड़ था।
- FY24 में यह घटकर 6.19 करोड़ रह गया।
- FY25 में इसमें और 9 प्रतिशत गिरावट का अनुमान है।
- चालू वित्त वर्ष के अंत तक यह संख्या 5.1 करोड़ से नीचे जा सकती है।
हालांकि राहत की बात यह है कि रेवेन्यू में गिरावट की गति कम होने से FY26 में टीवी सेक्टर का ऑपरेटिंग मार्जिन 44 से 45 प्रतिशत के आसपास स्थिर रह सकता है।
किन चैनलों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स द्वारा लौटाए गए लाइसेंस इस प्रकार हैं।
- JioStar ने Colours Odia, MTV Beats, VH1 और Comedy Central के लाइसेंस सरेंडर किए।
- Zee Entertainment ने Zee Sea चैनल को बंद किया।
- Enter10 Media ने Dangal HD और Dangal Oriya के लाइसेंस लौटाए और नए चैनल लॉन्च की योजना फिलहाल टाल दी।
- ABP Network ने ज्यादा लागत और कमजोर कमाई के कारण ABP News HD को बंद किया।
- NDTV ने NDTV Gujarati चैनल का लाइसेंस वापस किया।
इन फैसलों से यह साफ है कि HD और क्षेत्रीय चैनल, जहाँ लागत अधिक और विज्ञापन सीमित है, सबसे ज्यादा दबाव में हैं।
आगे क्या बदलेगा भारतीय टीवी का भविष्य
मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह ट्रेंड और तेज हो सकता है। पारंपरिक टीवी ब्रॉडकास्टिंग को अब खुद को डिजिटल इकोसिस्टम के अनुरूप ढालना होगा। केवल चैनल चलाना ही नहीं, बल्कि मल्टी-प्लेटफॉर्म स्ट्रैटेजी, OTT पर मजबूत मौजूदगी और डेटा-ड्रिवन कंटेंट प्लानिंग भविष्य की जरूरत बन चुकी है।
टीवी पूरी तरह खत्म नहीं होगा, लेकिन उसका स्वरूप बदलेगा। लाइव न्यूज, स्पोर्ट्स और बड़े इवेंट्स में टीवी की प्रासंगिकता बनी रह सकती है, जबकि मनोरंजन और ऑन-डिमांड कंटेंट का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट होता जाएगा।



