|| आशु-वाणी | मिलावट ||

मिलावट

मिलावट के इस दौर में,
मिल रहा नकली अमावट है।
प्यार की मण्डी में
वासना की लबालब मिलावट है।

सँभल कर चलना बच्चू !
इस शहर में हर गली-हर कूचे में बहुत फिसलन है।
माँ के प्यार, ममता, दूध-सा शुद्ध कोई नहीं,
सिर्फ इजहारेइश्क का चलन है।

जो बर्फ-सा लगता ठंढा तुम्हें,
तासीर उसकी भी गरम है।
कठोर से भी ज्यादा कठोर जो है यहाँ,
बाहर से दिखता वह भी नरम है।

किसको कहोगे अपना इस शहर में ?
बस स्वार्थ के सम्बन्ध फलते-फूलते यहाँ।
भरत-सा भाई, श्रवण-सा सुत, सावित्री-सी सती
अब इस दौर में दिखती कहाँ ?

फूंक-फूंक कर कदम रखना ये मुसाफिर !
चींटियों की राह में चलते हाथी जिस कदर।

लेखक
श्री विनय शंकर दीक्षित
“आशु”

READ MORE POETRY BY ASHU JI CLICK HERE
JOIN OUR WHATSAPP CHANNEL CLICK HERE

ALSO READ  गोवर्धन पूजा 2023 | जानिए पूरी जानकारी | 2YoDo विशेष

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here


Stay Connected

21,259FansLike
112FollowersFollow
1,540SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles