चीन के शेन्ज़ेन स्थित साउदर्न यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (SUSTech) के वैज्ञानिकों ने एक नए प्रकार के सुपरकंडक्टर की खोज की है, जो सामान्य वायुमंडलीय दबाव में 45 केल्विन (-228°C) पर विद्युत का प्रवाह बिना किसी प्रतिरोध के कर सकता है।
यह नई खोज निकेल ऑक्साइड-आधारित यौगिकों में की गई है, जो भविष्य में चिकित्सा इमेजिंग, ऊर्जा संचरण और अन्य तकनीकी अनुप्रयोगों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
निकेल ऑक्साइड सुपरकंडक्टर की विशेषताएं
Nature में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में कृत्रिम रूप से विकसित निकेलेट (Nickelate) क्रिस्टल की एक पतली फिल्म में सुपरकंडक्टिंग गुण देखे।
- यह पदार्थ बिजली के प्रतिरोध को पूरी तरह समाप्त कर देता है और चुंबकीय क्षेत्र को निष्कासित करता है, जो सुपरकंडक्टिविटी के दो महत्वपूर्ण लक्षण हैं।
- हांगकांग सिटी यूनिवर्सिटी के भौतिक विज्ञानी डैफेंग ली के अनुसार, अगर इस पदार्थ की क्रिटिकल टेम्परेचर (Critical Temperature) को और बढ़ाया जाए, तो यह वास्तविक अनुप्रयोगों में अधिक उपयोगी हो सकता है।
निकेलेट अब क्यूप्रेट (Cuprates) और पनिक्टाइड (Pnictides) की तरह एक अनकन्वेंशनल सुपरकंडक्टर की श्रेणी में शामिल हो गया है, जो सामान्य वायुमंडलीय दबाव पर -123°C तक काम करने में सक्षम है।
यह खोज वैज्ञानिकों को सुपरकंडक्टिविटी की कार्यप्रणाली को और अधिक समझने में मदद कर सकती है और संभवतः भविष्य में रूम-टेम्परेचर सुपरकंडक्टर्स के विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
भविष्य की संभावनाएं और शोध की दिशा
निकेलेट सुपरकंडक्टर के प्रति उत्साह 2019 से बढ़ रहा है, जब इस सामग्री में पहली बार सुपरकंडक्टिविटी के संकेत मिले थे।
- 2023 में एक बड़ी सफलता मिली, जब वैज्ञानिकों ने उच्च दबाव में निकेलेट में सुपरकंडक्टिविटी देखी थी।
- लेकिन नवीनतम शोध से यह स्पष्ट हुआ कि यह प्रभाव सामान्य वायुमंडलीय दबाव में भी होता है, जो इसे व्यवहारिक अनुप्रयोगों के लिए और अधिक उपयुक्त बनाता है।
दिसंबर 2023 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पहली बार यह प्रमाणित किया कि निकेलेट सुपरकंडक्टिविटी सामान्य परिस्थितियों में भी संभव है। अब SUSTech के वैज्ञानिकों ने इसे और अधिक प्रमाणित किया है।
शोध के सह-लेखक और SUSTech के भौतिक विज्ञानी झुओयू चेन ने कहा कि “हमारा अगला लक्ष्य इस पदार्थ की क्रिटिकल टेम्परेचर को बढ़ाना है, ताकि इसे व्यावहारिक अनुप्रयोगों में उपयोग किया जा सके।”
इसके लिए वैज्ञानिक सामग्री की संरचना और उत्पादन विधियों में सुधार करने पर काम कर रहे हैं।
सुपरकंडक्टिविटी पर वैश्विक रुचि और विवाद
सुपरकंडक्टिविटी पर वैज्ञानिक समुदाय में गहन शोध जारी है, लेकिन हाल के वर्षों में कुछ विवादास्पद दावे भी सामने आए हैं।
- यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर के भौतिक विज्ञानी रंगा डायस द्वारा किए गए रूम-टेम्परेचर सुपरकंडक्टिविटी के दावे बाद में गलत साबित हुए और उन्हें वापस ले लिया गया।
- इसी तरह, LK-99 नामक पदार्थ के रूम-टेम्परेचर सुपरकंडक्टिविटी का दावा भी बाद में खंडित हो गया।
हालांकि, निकेलेट सुपरकंडक्टर की खोज वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और व्यवहारिक साबित हो रही है, जिससे भविष्य में ऊर्जा-कुशल तकनीकों के विकास की उम्मीद बढ़ गई है।



