मानव मस्तिष्क ऊतक में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है, जिससे संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर गंभीर बहस छिड़ गई है। हाल ही में Nature Medicine में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, 2016 से 2024 के बीच मस्तिष्क में माइक्रोप्लास्टिक की सांद्रता लगभग 50% तक बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिमेंशिया से पीड़ित लोगों में माइक्रोप्लास्टिक का स्तर सामान्य व्यक्तियों की तुलना में लगभग छह गुना अधिक था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि माइक्रोप्लास्टिक डिमेंशिया का कारण बनते हैं या नहीं। शोधकर्ताओं ने इस विषय पर और अधिक गहन अध्ययन की आवश्यकता जताई है।
शोध में बढ़ते माइक्रोप्लास्टिक स्तरों का खुलासा
Nature Medicine में 3 फरवरी को प्रकाशित इस अध्ययन में 2016 और 2024 के बीच मानव मस्तिष्क में माइक्रोप्लास्टिक सांद्रता में भारी वृद्धि दर्ज की गई।
शोधकर्ताओं ने 28 लोगों (2016 में मृत) और 24 लोगों (2024 में मृत) के मस्तिष्क, यकृत और गुर्दे के ऊतकों की जांच की।
- मस्तिष्क में सबसे अधिक माइक्रोप्लास्टिक पाए गए, जो यकृत और गुर्दे की तुलना में 7 से 30 गुना अधिक थे।
- सबसे अधिक पाया जाने वाला माइक्रोप्लास्टिक पॉलीथीन (polyethylene) था, जो खाद्य पैकेजिंग में आमतौर पर उपयोग किया जाता है। यह कुल 75% माइक्रोप्लास्टिक का हिस्सा था।
- 1997 से 2013 के बीच लिए गए नमूनों की तुलना में, हाल के वर्षों में माइक्रोप्लास्टिक का स्तर लगातार बढ़ता गया है।
क्या माइक्रोप्लास्टिक मस्तिष्क स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है?
शोध के सह-लेखक और न्यू मैक्सिको विश्वविद्यालय के टॉक्सिकोलॉजिस्ट मैथ्यू कैंपन के अनुसार, माइक्रोप्लास्टिक का संचय मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को बाधित कर सकता है और तंत्रिका कनेक्शन में हस्तक्षेप कर सकता है।
हालांकि, अभी तक डिमेंशिया और माइक्रोप्लास्टिक के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है। लेकिन यह तथ्य कि डिमेंशिया रोगियों में माइक्रोप्लास्टिक सांद्रता छह गुना अधिक थी, इस विषय पर अधिक शोध की आवश्यकता को इंगित करता है।
क्या अध्ययन की पद्धति पर सवाल उठाना उचित है?
कुछ वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन की शोध पद्धति पर सवाल उठाए हैं। आरएमआईटी विश्वविद्यालय, मेलबर्न के प्रोफेसर ओलिवर जोन्स ने Live Science को बताया कि अध्ययन में इस्तेमाल की गई प्रमुख विश्लेषण तकनीक pyrolysis-gas chromatography-mass spectrometry मस्तिष्क में मौजूद फैट्स के कारण माइक्रोप्लास्टिक सांद्रता को बढ़ा-चढ़ाकर दिखा सकती है।
हालांकि, यूट्रेक्ट विश्वविद्यालय की विषविज्ञानी एम्मा कास्टील ने Live Science को दिए बयान में कहा कि भले ही माइक्रोप्लास्टिक की सटीक मात्रा अनिश्चित हो, लेकिन इसका मस्तिष्क में पाया जाना ही चिंता का विषय है और इस पर और गहन शोध किया जाना चाहिए।



