अक्षय तृतीया, जिसे आखातीज के नाम से भी जाना जाता है, और भगवान परशुराम जयंती का शुभ अवसर जब एक ही दिन पड़ता है, तो यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ हो जाता है, बल्कि संस्कृति, परंपरा और आत्मिक चेतना का संगम बन जाता है।
अक्षय तृतीय कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। अक्षय तृतीया का अर्थ ही है वह दिन जो कभी क्षय न हो, अर्थात् इस दिन किया गया हर शुभ कर्म अनंत फल देता है।
2025 में यह पावन पर्व 29 अप्रैल की सायं 5:31 बजे से प्रारंभ होकर 30 अप्रैल को दोपहर 2:12 बजे तक रहेगा, लेकिन उदया तिथि के अनुसार यह 30 अप्रैल को मनाया जाएगा।
भगवान परशुराम का जन्म और पौराणिक महत्व
भगवान परशुराम, भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं, जिनका जन्म वैशाख शुक्ल तृतीया को हुआ था। उनका जीवन क्षत्रियों के अन्याय के विरुद्ध युद्ध और समाज में समरसता के लिए प्रेरणा का प्रतीक है।
वह न केवल ब्राह्मणत्व और क्षात्रत्व का संगम हैं, बल्कि शौर्य, नीति और तप का जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने समाज के हर वर्ग को जोड़ने और न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित करने के लिए समुद्रों से भूमि निकालकर नए नगर बसाए और पर्वतों का सीना चीरकर नदियों की धाराएं प्रवाहित कीं।
अक्षय तृतीया का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
- परशुराम जयंती: इस दिन भगवान परशुराम का अवतरण प्रदोष काल में हुआ था। उनका जन्म सतयुग और त्रेतायुग के संधिकाल में हुआ, और उनका जीवन कलियुग के अंत तक चलने वाला माना जाता है।
- मां गंगा का अवतरण: मान्यता है कि इस दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर उतरीं।
- मां अन्नपूर्णा का जन्म: इस दिन अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा का भी प्राकट्य हुआ था।
- महाभारत का आरंभ: मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास ने इसी दिन गणेश जी को महाभारत लिखना आरंभ कराया था।
विवाह और अबूझ मुहूर्त: इस बार क्यों नहीं है योग?
अक्षय तृतीया को सामान्यतः विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है। लेकिन 2025 में यह विशेष दिन विवाह के लिए शुभ नहीं है क्योंकि गुरु और शुक्र ग्रह दोनों अस्त हैं, जो विवाह के प्रधान कारक ग्रह माने जाते हैं। इस कारण 2024 की तरह ही इस बार भी विवाह का योग उपलब्ध नहीं है।
सोना खरीदने का शुभ समय और आर्थिक निवेश
अक्षय तृतीया के दिन स्वर्ण खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह समृद्धि और अक्षय संपत्ति का प्रतीक होता है। 2025 में सोना खरीदने का शुभ समय प्रातः 5:41 से दोपहर 2:12 तक रहेगा, जो कुल 8 घंटे 30 मिनट का योग बनाता है। इस दौरान निवेश, संपत्ति खरीद, नया व्यवसाय शुरू करने जैसे कार्य विशेष रूप से लाभकारी माने जाते हैं।
परशुराम जी का समतावादी दृष्टिकोण
परशुराम जी को सिर्फ ब्राह्मण या क्षत्रियों के विरोधी के रूप में देखना गलत है। उन्होंने समाज के हर उस व्यक्ति को न्याय दिलाया जो पीड़ित और शोषित था।
उनका उद्देश्य था धर्म की स्थापना और समरस समाज का निर्माण। उन्होंने संस्कारविहीन ब्राह्मणों को भी दंड दिया और संस्कारी व्यक्तियों को समाज में उच्च स्थान दिया, चाहे वे किसी भी जाति के हों।
भृगु वंश की महिमा और योगदान
परशुराम जी भृगु वंश से थे। इस वंश में ऋषि भृगु, शुक्राचार्य, जमदग्नि, दधीचि जैसे महान ऋषियों ने जन्म लिया। ब्रह्मा जी ने ऋषि भृगु को सृष्टि की संहिता देने का कार्य सौंपा था।
भृगु संहिता को ज्योतिष और अंतरिक्ष विज्ञान का आधार माना जाता है। भगवान परशुराम इसी वंश के तेजस्वी अवतार थे, जिन्होंने न केवल आध्यात्मिक बल्कि सामाजिक और भूगोलिक परिवर्तनों में भी योगदान दिया।
भविष्य दृष्टि: कलियुग के अंत में पुनः अवतरण
मान्यता है कि परशुराम जी अभी भी जीवित हैं और कलियुग के अंत में भगवान कल्कि को शस्त्र विद्या प्रदान करने के लिए पुनः प्रकट होंगे।
इसलिए उन्हें चिरंजीवी (अमर) माना गया है। श्रीराम और श्रीकृष्ण के युग में भी उनके दर्शन और योगदान के अनेक प्रमाण शास्त्रों में मिलते हैं।
अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती का संगम वर्ष में एक बार आता है, और यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा, सांस्कृतिक समरसता और धार्मिक आस्था का प्रतीक बन जाता है।
यह समय है खुद को पुनः संयम, दान, आस्था और समरसता के मार्ग पर चलाने का। इस दिन किए गए पुण्य कर्म, निवेश, पूजा या सेवा के फल कभी समाप्त नहीं होते — यही इसका ‘अक्षय’ स्वरूप है।



