हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है और भगवान शिव को समर्पित होता है। माघ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है।
यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आइए, जानते हैं सोम प्रदोष व्रत 2025 के बारे में विस्तार से।
सोम प्रदोष व्रत का महत्व
सोम प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह व्रत कुंडली में अशुभ ग्रहों के प्रभाव को खत्म करने के लिए भी किया जाता है।
काले तिल को जल में मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करने से राहु-केतु और शनि की बाधा से मुक्ति मिलती है।
शुभ मुहूर्त
- त्रयोदशी तिथि आरंभ: 9 फरवरी 2025, शाम 07:25 बजे
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 10 फरवरी 2025, शाम 07:00 बजे
- प्रदोष काल: 9 फरवरी, शाम 07:25 बजे से रात 08:42 बजे तक
पूजा विधि
- पवित्र स्थान तैयार करें: एक साफ जगह या वेदी पर भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर रखें।
- गंगाजल से स्नान कराएं: भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर को गंगाजल से स्नान कराएं।
- चढ़ावे की सामग्री: अक्षत, बेलपत्र, चंदन, फूल, फल, भांग, शहद, अगरबत्ती और दीपक अर्पित करें।
- मंत्र जाप: “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
- शिव चालीसा का पाठ: भगवान शिव की स्तुति के लिए शिव चालीसा का पाठ करें।
- आरती: कपूर या घी के दीपक से भगवान शिव की आरती करें।
- प्रार्थना: पूजा के अंत में अपने परिवार और संतान की सुख-समृद्धि की कामना करें।
सोम प्रदोष व्रत का पालन
सोम प्रदोष व्रत में भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम के समय शिव मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करते हैं। व्रत की विधि और कथा सुनने या पढ़ने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।
लाभ
- मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं।
- विवाह में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं।
- स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।
सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का एक शुभ अवसर है। यह व्रत न केवल हमारे जीवन में सुख-समृद्धि लाता है बल्कि हमें आध्यात्मिक शांति भी प्रदान करता है। इस व्रत को पूरे विधि-विधान से करने से भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है।
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