श्रावण मास की अमावस्या तिथि को ‘हरियाली अमावस्या’ के रूप में विशेष मान्यता प्राप्त है। यह दिन प्रकृति, धर्म और आत्मशुद्धि का संगम है। सावन के इस विशिष्ट दिन पर देवों के देव महादेव और माता पार्वती की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत, पूजा, दान और तर्पण करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि आती है।
हरियाली अमावस्या कब है?
पंचांगानुसार, सावन मास की अमावस्या तिथि का प्रारंभ : 24 जुलाई 2025 को रात 02:28 बजे से होगा।
तिथि का समापन : 25 जुलाई 2025 को रात 12:40 बजे होगा।
सूर्योदय आधारित तिथि गिनती के अनुसार, हरियाली अमावस्या 24 जुलाई को मनाई जाएगी।
हरियाली अमावस्या के दुर्लभ योग
इस बार की हरियाली अमावस्या पर एक साथ कई शुभ योग बन रहे हैं जो इस दिन की आध्यात्मिक ऊर्जा को कई गुना बढ़ाते हैं:
शुभ योगों की सूची
- हर्षण योग – सुबह 09:51 तक
- रवि पुष्य योग – 24 जुलाई को शाम 04:43 से 25 जुलाई सुबह 05:39 तक
- अमृत सिद्धि योग – 24 जुलाई को शाम 04:43 से 25 जुलाई सुबह 05:39 तक
- सर्वार्थ सिद्धि योग – दिनभर
- शिववास योग – सुबह से लेकर 25 जुलाई की रात 12:40 तक
- पुनर्वसु नक्षत्र – शाम 04:43 तक
- पुष्य नक्षत्र – इसके बाद संयोग में
इन सभी योगों में पूजा-पाठ और दान करना अत्यंत फलदायक और मोक्षदायक माना गया है।
शिववास योग का महत्व
इस अमावस्या पर शिववास योग अत्यंत दुर्लभ है। मान्यता है कि इस योग में भगवान शिव स्वयं कैलाश पर माता गौरी के साथ स्थित रहते हैं। इस समय किए गए पूजन से साधक को असीम सुख-संपत्ति, वैवाहिक सौहार्द और जीवन के संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है।
हरियाली अमावस्या का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
हरियाली अमावस्या केवल पूजा-पाठ का ही नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ने का भी प्रतीक है। इस दिन वृक्षारोपण करना, तुलसी के पौधे का पूजन, जल स्रोतों की सफाई और हरियाली बढ़ाने के कार्य करना विशेष पुण्यदायी होता है।
पुराणों के अनुसार, इस दिन तर्पण और पिंडदान से पितरों को शांति मिलती है, साथ ही वर्तमान और पूर्व जन्म के पापों से भी मुक्ति मिलती है।
मान्यता:
- ग्रहदोष निवारण हेतु शिव-पार्वती पूजन
- विशेष व्रत से मानसिक शुद्धि और आत्मिक उन्नति
- जल अर्पण और ब्राह्मण भोज से पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है।
हरियाली अमावस्या की पूजन विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- घर या मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, पुष्प अर्पित करें।
- रुद्राक्ष की माला से महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें –
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।” - व्रत रखने वाले पूरे दिन फलाहार करें और रात में कथा सुनें।
- अगले दिन व्रत का पारण करें।
वृक्षारोपण और पर्यावरण सेवा का पर्व
हरियाली अमावस्या को हरियाली का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन वृक्षारोपण करने से पुण्य मिलता है और पर्यावरण की रक्षा होती है। तुलसी, पीपल, नीम जैसे पौधों का रोपण अत्यंत शुभ होता है।
पूरे भारतवर्ष के मंदिरों में शिव-पार्वती की विशेष पूजा की जाएगी। प्रमुख तीर्थस्थलों में हरिद्वार, काशी, उज्जैन, नासिक, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, त्रयंबकेश्वर आदि में विशेष अनुष्ठान आयोजित होंगे।