यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI ट्रांजैक्शन्स के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसमें ऑटो एक्सेप्टेंस और रिजेक्शन ऑफ चार्जबैक जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं शामिल हैं। ये बदलाव डिजिटल भुगतान प्रणाली को और सुरक्षित एवं प्रभावी बनाने के लिए किए गए हैं।
क्या हैं UPI के नए नियम?
NPCI ने UPI ट्रांजैक्शन्स से जुड़े चार्जबैक के ऑटोमैटिक एक्सेप्टेंस और रिजेक्शन को लागू किया है। अब किसी चार्जबैक को मंजूरी या अस्वीकृत करने की प्रक्रिया Transaction Credit Confirmation (TCC) और रिटर्न्स के आधार पर स्वतः होगी। यह प्रक्रिया केवल बुल्क अपलोड्स और UDIR (UPI Dispute Resolution) के लिए लागू होगी, लेकिन फ्रंट-एंड ऑप्शन के लिए नहीं।
चार्जबैक क्या होता है?
चार्जबैक एक विवाद निवारण प्रक्रिया है, जहां धन हस्तांतरित करने वाले बैंक (remitting banks) को यह अधिकार होता है कि वे किसी ट्रांजैक्शन को लेकर विवाद खड़ा कर सकते हैं, अगर वे मानते हैं कि वह लेनदेन गलत था।
वर्तमान प्रणाली के तहत, जब कोई चार्जबैक दर्ज किया जाता है, तो लाभार्थी बैंक (beneficiary bank) के पास इसे संसाधित करने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता है। यह तब और अधिक जटिल हो जाता है जब रेमिटिंग बैंक T+0 (ट्रांजैक्शन वाले दिन) से ही चार्जबैक उठाने लगता है।
इससे कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां लाभार्थी बैंक ने बिना पुष्टि किए रिटर्न्स दर्ज किए, जिससे चार्जबैक पहले ही दर्ज हो चुका था और इसे ‘स्वीकृत’ मान लिया गया था। इसके कारण आरबीआई द्वारा लगाए गए दंड का भी सामना करना पड़ा।
NPCI ने चार्जबैक प्रक्रिया को ऑटोमैटिक किया
इन समस्याओं को हल करने के लिए NPCI ने चार्जबैक के स्वचालित स्वीकृति और अस्वीकृति प्रणाली को लागू करने की घोषणा की है। यह नई प्रक्रिया 15 फरवरी 2025 से Unified Dispute and Issue Resolution System (URCS) में शामिल कर दी जाएगी।
NPCI के अनुसार, सभी सदस्य बैंकों को इस प्रक्रिया को समझने और इसे लागू करने के लिए निर्देश दिया गया है।
UPI ने बनाया नया रिकॉर्ड
NPCI के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 में UPI ने 16.99 बिलियन लेनदेन (लगभग 23.48 लाख करोड़ रुपये) का नया कीर्तिमान स्थापित किया। यह दर्शाता है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम लगातार तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसे और सुरक्षित बनाने के लिए NPCI नए नियम लागू कर रहा है।
UPI के नए नियमों का असर
- लेनदेन सुरक्षा में सुधार: अब चार्जबैक विवादों को तेज़ी से हल किया जा सकेगा।
- बैंकों की जवाबदेही बढ़ेगी: बैंकों को अब TCC और रिटर्न की स्थिति को पहले जांचना होगा।
- डिजिटल भुगतान का भरोसा बढ़ेगा: उपयोगकर्ता अधिक सुरक्षित और पारदर्शी सिस्टम का अनुभव करेंगे।
- चार्जबैक से जुड़े विवाद कम होंगे: स्वचालित प्रणाली होने से गलत तरीके से चार्जबैक उठाने के मामले घटेंगे।
UPI लेनदेन को और सुरक्षित, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने के लिए NPCI लगातार सुधार कर रहा है। चार्जबैक की ऑटोमैटिक स्वीकृति और अस्वीकृति प्रणाली एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उपयोगकर्ताओं और बैंकों के लिए लाभदायक साबित होगा। डिजिटल इंडिया को आगे बढ़ाने की दिशा में यह एक और मजबूत प्रयास है।