ब्लू मून, जिसे अक्सर दुर्लभता का प्रतीक माना जाता है, अगली बार 31 मई 2026 को देखा जाएगा। यह घटना एक ही कैलेंडर महीने में दूसरी बार पूर्णिमा होने का संकेत देती है। चंद्र चक्र लगभग 29.5 दिनों का होता है, जिसके कारण हर साल औसतन 12 पूर्णिमा होती हैं।
लेकिन कैलेंडर वर्ष और चंद्र चक्र के बीच के अंतर के कारण हर 2-3 साल में 13वीं पूर्णिमा होती है, जिसे ब्लू मून कहा जाता है।
ब्लू मून के प्रकार
नासा के अनुसार, ब्लू मून को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
- मासिक ब्लू मून (Monthly Blue Moon): जब एक कैलेंडर महीने में दो बार पूर्णिमा हो।
- मौसमी ब्लू मून (Seasonal Blue Moon): जब किसी मौसम में चार पूर्णिमा हों, तो तीसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहा जाता है।
आगामी ब्लू मून 31 मई 2026 को एक मासिक ब्लू मून होगा। हालांकि इसका नाम “ब्लू मून” है, लेकिन इस दिन चंद्रमा नीला नहीं दिखाई देता। यह नाम ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं से लिया गया है।
ब्लू मून का ऐतिहासिक महत्व
आखिरी ब्लू मून 19 अगस्त 2024 को देखा गया था। इस प्रकार की घटनाएं दुर्लभ होते हुए भी खगोलीय गणना से पूर्वानुमानित होती हैं। अगला मौसमी ब्लू मून 21 अगस्त 2032 को होगा।
क्या चंद्रमा वास्तव में नीला दिख सकता है?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, चंद्रमा का नीला दिखाई देना अत्यंत दुर्लभ है। यह घटना तब होती है जब वातावरण में विशेष कण, जैसे ज्वालामुखी विस्फोट (जैसे 1883 में क्राकाटोआ विस्फोट) या बड़े पैमाने पर जंगल की आग से उत्पन्न कण, लाल प्रकाश को अवशोषित करते हैं। इसके परिणामस्वरूप चंद्रमा को नीले रंग का आभास होता है।