टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने हाल ही में टेलीकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशन कस्टमर प्रेफरेंस रेगुलेशन्स (TCCCPR), 2018 में दूसरा संशोधन किया है। इस संशोधन का उद्देश्य अनचाही स्पैम कॉल्स और प्रमोशनल मैसेज को रोकना है।
नए नियमों के तहत न केवल अनरजिस्टर्ड टेलीमार्केटर्स (UTMs) पर कार्रवाई होगी, बल्कि सेवा प्रदाताओं को भी अनदेखी करने पर जुर्माना देना होगा।
इस पहल की उद्योग विशेषज्ञों ने सराहना की है, लेकिन सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने इन नियमों पर आपत्ति जताई है।
स्पैम रिपोर्टिंग में आसानी और त्वरित कार्रवाई
ट्राई के नए नियमों के तहत अब ग्राहक तीन दिन की बजाय सात दिन के भीतर स्पैम कॉल या मैसेज की शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा, अब ग्राहकों को अपनी प्राथमिकताएं पंजीकृत कराने की आवश्यकता नहीं होगी। टेलीकॉम ऑपरेटर्स को अब 30 दिन की जगह 5 दिन के भीतर शिकायत पर कार्रवाई करनी होगी।
नए नियमों के अनुसार:
- पांच शिकायतें दस दिन में: यदि किसी भेजने वाले के खिलाफ दस दिनों में पांच शिकायतें आती हैं, तो ऑपरेटर को तत्काल कार्रवाई करनी होगी।
- सभी प्रमोशनल मैसेज से बाहर निकलने का विकल्प: उपभोक्ताओं को सभी प्रकार के प्रमोशनल मैसेज से पूरी तरह बाहर निकलने का विकल्प मिलेगा।
मैसेज की पहचान के लिए नई कोडिंग प्रणाली
अब प्रत्येक मैसेज हेडर में एक कोड होगा, जिससे उपभोक्ताओं को यह पता चल सकेगा कि संदेश किस प्रकार का है:
- -P: प्रमोशनल मैसेज
- -S: सर्विस मैसेज
- -T: ट्रांजेक्शनल मैसेज
- -G: सरकारी मैसेज
इस कोडिंग प्रणाली से ग्राहकों को संदिग्ध या अनचाहे मैसेज की पहचान करना आसान होगा।
स्पैम कॉल रोकने के लिए ‘हनीपॉट’ तकनीक
ट्राई ने ऑपरेटर्स को स्पैमर्स की पहचान करने के लिए कॉल और मैसेज पैटर्न का विश्लेषण करने को कहा है। इसके लिए ‘हनीपॉट’ नामक तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जो स्पैम गतिविधियों को ट्रैक करेगी। ऑपरेटर्स को भेजे गए संदेशों की पूर्ण ट्रैसेबिलिटी सुनिश्चित करनी होगी, ताकि जरूरत पड़ने पर स्पैमर की पहचान की जा सके।
स्पैमर्स के लिए कठोर दंड
नए नियमों में स्पैमर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है:
- पहली बार नियम उल्लंघन करने पर 15 दिनों तक आउटगोइंग सेवाओं पर रोक।
- दोबारा गलती दोहराने पर एक वर्ष के लिए कनेक्शन रद्द।
- प्रमोशनल कॉल्स के लिए 10 अंकों वाले सामान्य मोबाइल नंबरों के इस्तेमाल पर रोक।
टेलीकॉम ऑपरेटर्स पर भी जुर्माना
ट्राई ने पहली बार टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं पर भी जुर्माने का प्रावधान किया है:
- पहली गलती पर 2 लाख रुपये का जुर्माना।
- दूसरी गलती पर 5 लाख रुपये का जुर्माना।
- तीसरी बार नियम तोड़ने पर 10 लाख रुपये तक का दंड।
इसके अलावा, टेलीमार्केटर्स को सुरक्षा राशि के रूप में एक डिपॉजिट देना होगा, जिसे उल्लंघन की स्थिति में जब्त कर लिया जाएगा।
COAI की आपत्ति
सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने ट्राई के इस संशोधन पर नाराजगी जाहिर की है। COAI का कहना है कि टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को दंडित करना उचित नहीं है, क्योंकि वे केवल मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं। COAI के महानिदेशक एसपी कोचर ने कहा कि असल लाभार्थी टेलीमार्केटर्स होते हैं, इसलिए दंड उन्हें मिलना चाहिए।
COAI ने यह भी कहा कि ओवर-द-टॉप (OTT) एप्स के जरिए अनचाही कॉल और मैसेज की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन इन पर कोई नियंत्रण नहीं किया गया है।
TRAI के नए नियम आम ग्राहकों को राहत देने के लिए बनाए गए हैं। ये नियम स्पैम कॉल्स और मैसेज को रोकने में मदद करेंगे और सेवा प्रदाताओं को अधिक सतर्क बनाएंगे। हालांकि, टेलीकॉम कंपनियों की चिंताओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब देखना यह होगा कि यह नया संशोधन कितना प्रभावी साबित होता है।



