खगोलविदों ने पहली बार किसी महाविशालकाय ब्लैक होल से निकलते प्लाज्मा जेट को प्रत्यक्ष रूप से देखा है, जो प्रकाश की गति के एक-तिहाई भाग की रफ्तार से यात्रा कर रहा है। यह दुर्लभ घटना पृथ्वी से 270 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर, ड्रेको तारामंडल में स्थित आकाशगंगा 1ES 1927+654 के केंद्र में देखी गई।
यह ब्लैक होल सूर्य से 1.4 अरब गुना अधिक भारी है। इस खोज से ब्लैक होल जेट्स के निर्माण और उनके व्यवहार को समझने में महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिन्हें अब तक उनके निर्माण के प्रारंभिक चरण में नहीं देखा गया था।
ऐतिहासिक खोज: ब्लैक होल जेट्स के रहस्य पर नई रोशनी
इस अध्ययन को “द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स” में प्रकाशित किया गया, जिसमें बताया गया कि खगोलविदों ने 2023 में इस आकाशगंगा के केंद्र में एक शक्तिशाली रेडियो फ्लेयर के बाद जेट्स को उभरते हुए देखा।
“वेरी लॉन्ग बेसलाइन एरे (VLBA)” द्वारा एकत्र किए गए डेटा में यह सामने आया कि ब्लैक होल के ध्रुवों से अत्यधिक आयनित प्लाज्मा के जेट्स निकल रहे थे।
शुरुआती दौर में यह जेट्स घने गैस के कारण अदृश्य थे, लेकिन 2024 की शुरुआत तक ये स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे, जिनकी लंबाई लगभग आधा प्रकाश-वर्ष तक फैली हुई थी। इस खोज की प्रमुख शोधकर्ता डॉ. एलीन मेयर, जो कि यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड बाल्टीमोर काउंटी में खगोल भौतिकीविद् हैं, ने कहा कि यह खोज ब्लैक होल के व्यवहार को प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का एक अद्वितीय अवसर प्रदान करती है।
ब्लैक होल जेट्स की दुर्लभ झलक
Space.com की रिपोर्ट के अनुसार, महाविशालकाय ब्लैक होल अक्सर द्विपदीय प्लाज्मा जेट्स को अत्यधिक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा प्रेरित कर बाहर फेंकते हैं। ये जेट्स कभी-कभी लाखों प्रकाश-वर्ष तक विस्तारित हो सकते हैं। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं था कि ये जेट्स ब्लैक होल के पदार्थ-चक्रण तंत्र से कैसे निकलते हैं।
लेकिन इस खोज ने वैज्ञानिकों को यह समझने का एक दुर्लभ अवसर दिया कि ब्लैक होल अपने परिवेश के पदार्थ को अवशोषित करने के बजाय उसे तेजी से बाहर भी फेंक सकते हैं। यह एक ऐसा परिघटनात्मक बदलाव है जिसे पहली बार वैज्ञानिकों ने वास्तविक समय में देखा है।
खोज का महत्व और ब्लैक होल की गतिविधियां
इस विशेष ब्लैक होल 1ES 1927+654 को 2018 में पहली बार तब पहचाना गया जब इसमें असामान्य तरीके से अलग-अलग तरंगदैर्घ्य पर प्रकाशीय विस्फोट देखने को मिले थे। यह गतिविधि कुछ समय तक शांत रही, लेकिन 2023 में दोबारा तेज हो गई, जिससे वैज्ञानिकों को इस अद्वितीय अवलोकन का अवसर मिला।
इस खोज से हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि:
- ब्लैक होल से प्लाज्मा जेट्स कैसे उत्पन्न होते हैं?
- कौन-से चुंबकीय बल इन जेट्स को नियंत्रित करते हैं?
- ब्लैक होल की गतिविधियों और ब्रह्मांडीय संरचना में इनकी भूमिका क्या है?
इस अध्ययन के निष्कर्षों का उपयोग खगोलविद भविष्य में ब्लैक होल के विकास मॉडल को और अधिक सटीक रूप से परिभाषित करने के लिए करेंगे।