OpenAI पर भारत में मुकदमा: क्या ANI की कॉपीराइट लड़ाई जीत पाएगी | Details Inside

OpenAI को भारतीय अदालतों में अपने खिलाफ चल रहे मुकदमे को खारिज करवाने के लिए कठिन लड़ाई लड़नी पड़ रही है। कंपनी का दावा है कि चूंकि इसका व्यवसाय अमेरिका में स्थित है, इसलिए भारतीय न्यायालयों को इस पर सुनवाई करने का अधिकार नहीं है।

हालांकि, इससे पहले टेलीग्राम (Telegram) और अन्य अमेरिकी टेक कंपनियों को ऐसे ही बचाव तर्कों के साथ भारत में कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

OpenAI और ANI के बीच विवाद का कारण

ANI (एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल) ने OpenAI पर अपने कॉपीराइट कंटेंट के अवैध उपयोग का आरोप लगाया है। यह मामला हाल के हफ्तों में तब और अधिक महत्वपूर्ण हो गया जब भारत के प्रमुख बिजनेस समूहों, जिनमें गौतम अडानी और मुकेश अंबानी से जुड़ी मीडिया कंपनियां शामिल हैं, ने भी OpenAI के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

OpenAI का कहना है कि वह अपने AI मॉडल को ‘Fair Use’ सिद्धांत के तहत सार्वजनिक जानकारी से प्रशिक्षित करता है। हालांकि, अमेरिका, जर्मनी और कनाडा में भी इसी तरह के कॉपीराइट उल्लंघन के मुकदमे चल रहे हैं।

OpenAI का भारत में कानूनी बचाव और चुनौतियां

OpenAI ने दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर अपने जवाब में कहा है कि:

  1. इसका डेटा सेंटर या सर्वर भारत में मौजूद नहीं है, इसलिए भारतीय अदालतों को इस मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं होना चाहिए।
  2. OpenAI की सेवा शर्तों के अनुसार सभी कानूनी विवाद सैन फ्रांसिस्को (San Francisco) में ही निपटाए जाने चाहिए।
  3. 2009 के एक भारतीय अदालती फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केवल वेबसाइट या ऐप की भारत में उपलब्धता से भारतीय अदालतों को अधिकार क्षेत्र नहीं मिल जाता।
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हालांकि, भारतीय न्यायिक विशेषज्ञों और अदालत द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों ने OpenAI के इन तर्कों को खारिज करने के संकेत दिए हैं।

Telegram केस से तुलना और संभावित असर

ANI बनाम OpenAI केस में 2022 में Telegram से जुड़े एक मामले को एक महत्वपूर्ण कानूनी उदाहरण बताया जा रहा है।

  • उस केस में एक भारतीय लेखक ने टेलीग्राम पर अपने कॉपीराइट कंटेंट के लीक होने पर मुकदमा दायर किया था।
  • टेलीग्राम ने तर्क दिया कि वह दुबई (Dubai) के कानूनों द्वारा शासित होता है और उसके सर्वर भारत से बाहर हैं।
  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि पारंपरिक क्षेत्राधिकार (territorial jurisdiction) की अवधारणा डिजिटल युग में समाप्त हो गई है।

यही कारण है कि OpenAI के लिए यह तर्क भारतीय अदालतों में टिकना मुश्किल हो सकता है।

OpenAI के लिए संभावित परिणाम

  1. अगर OpenAI की याचिका खारिज होती है, तो उसे भारत में मुकदमे का सामना करना होगा और ANI के कॉपीराइट डेटा को हटाने और ₹2 करोड़ ($230,000) के हर्जाने की मांग का जवाब देना होगा।
  2. अगर OpenAI केस हार जाता है, तो भारत में इसके संचालन और AI ट्रेनिंग डेटा तक पहुंच पर बड़े प्रतिबंध लग सकते हैं।
  3. अगर OpenAI अदालत के आदेश का पालन नहीं करता, तो भारत सरकार और न्यायपालिका द्वारा इसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

भारत सरकार और टेक कंपनियों के बीच संबंध

OpenAI पर भारतीय अदालत में चल रहे मुकदमे से पहले भी भारत सरकार और बड़ी टेक कंपनियों के बीच टकराव देखा गया है:

  • 2021 में ट्विटर (अब X) ने भारतीय सरकार के आदेशों को मानने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद सरकार ने इसे “देश के कानूनों का पालन करना होगा” कहते हुए आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी।
  • सरकार के दबाव के बाद ट्विटर ने नियमों का पालन किया, लेकिन बाद में भारतीय सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया। यह मामला अभी भी लंबित है।
  • भारत के आईटी मंत्री ने अमेरिकी टेक कंपनियों के रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि “सिर्फ अमेरिकी कानूनों के तहत काम करने का दावा करना भारत में स्वीकार्य नहीं है।”
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OpenAI की भारत यात्रा और इसके संभावित मायने

ANI केस के अलावा, OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) 5 फरवरी को भारत का दौरा कर रहे हैं।

  • OpenAI के भारत में विस्तार की योजना हो सकती है, क्योंकि भारत इसका दूसरा सबसे बड़ा बाजार है।
  • OpenAI के सीनियर अधिकारी जेम्स हेयरस्टन (James Hairston) और श्रीनिवास नारायणन (Srinivas Narayanan) भी भारत आ रहे हैं।
  • OpenAI के भारतीय अधिकारी प्रज्ञा मिश्रा पहले ही कह चुके हैं कि भारत में ChatGPT का “मासिव अपटेक” हो रहा है।

OpenAI बनाम ANI का यह मामला भारतीय डिजिटल स्पेस में कॉपीराइट कानूनों और विदेशी टेक कंपनियों के अधिकार क्षेत्र पर एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित कर सकता है।अगर भारतीय अदालत OpenAI को इस मुकदमे में जवाबदेह ठहराती है, तो भविष्य में अन्य AI कंपनियों के लिए भी यही कानूनी स्थिति लागू हो सकती है।

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