नासा के परसेवेरेंस रोवर ने मंगल ग्रह के जेज़ेरो क्रेटर से 2.9 सेंटीमीटर की दुर्लभ बनावट वाली चट्टान का नमूना संग्रह किया है, जिसे ‘सिल्वर माउंटेन’ नाम दिया गया है। यह नमूना मंगल के गहरे अतीत के अवशेषों से जुड़ा हुआ माना जा रहा है, जिससे ग्रह के प्राचीन भूवैज्ञानिक इतिहास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
यह खोज रोवर के सैंपल कैशिंग सिस्टम कैमरा (CacheCam) द्वारा कैप्चर की गई छवियों के माध्यम से पुष्टि की गई। इसे मंगल ग्रह पर अब तक की सबसे दुर्लभ भूवैज्ञानिक खोजों में से एक माना जा रहा है।
‘सिल्वर माउंटेन’ नमूने का महत्व
नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) के अनुसार, जेज़ेरो क्रेटर के इन चट्टानों को सौरमंडल में अब तक की सबसे पुरानी चट्टानों में से एक माना जाता है। ये संरचनाएँ लगभग 4 अरब साल पहले के नोआचियन काल से जुड़ी हुई हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि ये चट्टानें किसी प्राचीन प्रभाव घटना (impact event) के कारण सतह पर आई थीं। ऐसे नमूने मंगल ग्रह की प्रारंभिक पर्पटी (crust) और भूवैज्ञानिक विकास के अध्ययन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
मंगल ग्रह के भूवैज्ञानिक इतिहास का अन्वेषण
Space.com की रिपोर्ट के अनुसार, जेज़ेरो क्रेटर वह स्थान है जहां परसेवेरेंस रोवर 2021 से काम कर रहा है। यह क्षेत्र कभी तरल पानी का घर हो सकता है।
इससे पहले के नमूनों में पानी के रासायनिक निशान मिले थे, जो प्राचीन सूक्ष्मजीव जीवन के संभावित संकेतों की खोज में महत्वपूर्ण हैं।
‘सिल्वर माउंटेन’ नमूने से उम्मीद की जा रही है कि यह मंगल के पर्यावरणीय इतिहास और पानी के साथ उसके संपर्क के बारे में नई जानकारी प्रदान करेगा।
नमूने को पृथ्वी पर लाने की चुनौतियाँ
नासा का मंगल नमूना वापसी मिशन (Mars Sample Return Mission), जिसका उद्देश्य इन नमूनों को पृथ्वी पर लाना है, कई बाधाओं का सामना कर रहा है।
बढ़ती लागत और परिचालन जटिलताओं के कारण, इस मिशन की समयसीमा अब कम से कम 2040 तक बढ़ा दी गई है। 2026 तक एक नई रणनीति तैयार की जाने की संभावना है।
इस बीच, चीन ने अपने मंगल नमूना वापसी मिशन की घोषणा की है, जो संभावित रूप से 2031 तक नमूने ला सकता है।