खगोलविदों ने प्रारंभिक ब्रह्मांड में अब तक का सबसे लंबा ब्लैक होल-संचालित जेट खोजा है, जिसकी लंबाई कम से कम 2 लाख प्रकाश वर्ष है—यह मिल्की वे की चौड़ाई से दोगुना है। यह खोज एक क्वासर J1601+3102 में की गई, जो उस समय अस्तित्व में था जब ब्रह्मांड केवल 1.2 अरब वर्ष पुराना था।
हालांकि इस क्वासर के केंद्र में स्थित विशालकाय ब्लैक होल का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान से 450 मिलियन गुना अधिक है, यह अब तक खोजे गए सबसे भारी ब्लैक होल में से नहीं है।
कई टेलीस्कोपों से किए गए अवलोकन
इस खोज के लिए कई दूरबीनों का उपयोग किया गया। सबसे पहले यह जेट लो-फ्रिक्वेंसी ऐरे (LOFAR) टेलीस्कोप, जो पूरे यूरोप में फैले रेडियो टेलीस्कोप का एक नेटवर्क है, से पहचाना गया। इसके अतिरिक्त, जेमिनी नियर-इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोग्राफ (GNIRS) और हॉबी एबर्ली टेलीस्कोप का उपयोग भी किया गया।
The Astrophysical Journal Letters में प्रकाशित शोध के अनुसार, वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्वासर के शक्तिशाली रेडियो जेट कैसे बनते हैं और ये आकाशगंगा के विकास में क्या भूमिका निभाते हैं।
स्पेस डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, इस अध्ययन की प्रमुख लेखिका और NOIRLab की शोधकर्ता ऐनीक ग्लाउडेमन्स ने बताया कि इस खोज से यह संकेत मिलता है कि प्रारंभिक ब्रह्मांड में शक्तिशाली जेट उत्पन्न करने के लिए असाधारण भारी ब्लैक होल या उच्च अभिवृद्धि दर (accretion rate) आवश्यक नहीं है।
असामान्य जेट संरचना
शोध में यह भी पता चला कि J1601+3102 से निकलने वाले दो जेट समान नहीं हैं। इनमें से एक जेट छोटा और कम चमकदार है, जिससे संकेत मिलता है कि पर्यावरणीय कारक इनके विकास को प्रभावित कर रहे हैं।
जेट की चमक और लंबाई में अंतर यह बताता है कि आसपास के पदार्थों के साथ हुए परस्पर क्रिया (interactions) जेट के विस्तार को प्रभावित कर सकती हैं।
डरहम यूनिवर्सिटी के खगोलशास्त्री और इस शोध दल के सदस्य फ्रिट्स स्विजेन ने कहा कि प्रारंभिक अनुमान था कि दक्षिणी जेट छोटा होगा और संभवतः उससे संबंधित नहीं होगा। हालांकि, LOFAR से किए गए अवलोकनों ने विस्तृत रेडियो संरचनाओं को उजागर किया, जो विशाल दूरी तक फैली हुई हैं।
खोज का महत्व
यह खोज इस बात पर प्रकाश डालती है कि ब्लैक होल और उनके जेट प्रारंभिक ब्रह्मांडीय विकास को कैसे प्रभावित करते हैं। हालांकि अधिकांश आकाशगंगाओं के केंद्र में सुपरमैसिव ब्लैक होल पाए जाते हैं, केवल कुछ ही क्वासर ऐसे हैं जो दृश्यमान जेट उत्पन्न करते हैं।
प्रारंभिक ब्रह्मांड में इतनी विशाल संरचना का पता लगाना यह दिखाता है कि विभिन्न तरंग दैर्ध्य पर काम करने वाले टेलीस्कोपों से डेटा संयोजन कितना प्रभावी है।
वैज्ञानिक अब इस क्वासर की अभिवृद्धि दर (accretion rate) निर्धारित करने का लक्ष्य रखते हैं ताकि यह समझा जा सके कि ये विशालकाय ब्रह्मांडीय संरचनाएं अपने आस-पास के वातावरण के साथ कैसे बातचीत करती हैं।