सनातन धर्म में मासिक कालाष्टमी का विशेष महत्व है। यह पर्व हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की पूजा की जाती है। कालाष्टमी का व्रत रखने और काल भैरव की आराधना करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह दिन तंत्र साधना के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
कालाष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त
- अष्टमी तिथि आरंभ: 22 मार्च, सुबह 04:23 बजे
- अष्टमी तिथि समाप्त: 23 मार्च, सुबह 05:23 बजे
- कालाष्टमी तिथि: 22 मार्च
पूजा का शुभ मुहूर्त:
रात 12:04 बजे से 12:51 बजे तक (निशा काल)
कालाष्टमी पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। - शिवलिंग और काल भैरव की प्रतिमा का अभिषेक:
भगवान शिव और काल भैरव की प्रतिमा को गंगाजल से अभिषेक करें। - पूजा सामग्री:
पूजा में दीपक, काले तिल, उड़द और सरसों के तेल का प्रयोग करें। - शाम की पूजा:
शाम को भगवान शिव, माता पार्वती और काल भैरव की विशेष पूजा करें। - काल भैरव स्तोत्र और कालभैरवाष्टक का पाठ:
रात में काल भैरव स्तोत्र और श्री कालभैरवाष्टक का पाठ करें। - काले कुत्ते को भोजन कराएं:
काले कुत्ते को मीठी रोटी खिलाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
काल भैरव को प्रसन्न करने के उपाय
- सरसों के तेल का दीपक जलाएं:
सरसों के तेल का दीपक जलाकर काल भैरव की पूजा करें। - दान करें:
गरीबों को वस्त्र और भोजन का दान करें। - बिल्वपत्र अर्पित करें:
21 बिल्वपत्रों पर “ॐ नम: शिवाय” लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। - कालभैरवाष्टक का पाठ:
श्री कालभैरवाष्टक का पाठ करने से काल भैरव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
कालाष्टमी के दिन न करें ये गलतियां
- शराब और मांसाहार का सेवन न करें।
- अहंकार न करें और बुजुर्गों व महिलाओं का अनादर न करें।
- नुकीली चीजों (चाकू, कैंची आदि) का अधिक प्रयोग न करें।
- किसी भी जानवर को परेशान न करें।
- माता-पिता और गुरु का अपमान करने से बचें।
कालाष्टमी का महत्व
कालाष्टमी का पर्व भगवान काल भैरव की आराधना के लिए समर्पित है। काल भैरव भगवान शिव के रौद्र रूप हैं, जो अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
इस दिन व्रत रखने और काल भैरव की पूजा करने से साधक को जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और उसके सभी मनोरथ पूरे होते हैं।
मासिक कालाष्टमी का पर्व हमें भगवान काल भैरव की कृपा प्राप्त करने और अपने जीवन को सुखमय बनाने का अवसर प्रदान करता है।
इस दिन व्रत और पूजा करके हम न केवल अपने पापों से मुक्त हो सकते हैं, बल्कि भगवान काल भैरव के आशीर्वाद से अपने सभी मनोरथों को भी पूरा कर सकते हैं।
आइए, इस पावन अवसर पर भगवान काल भैरव की आराधना करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को धन्य बनाएं।



