भारत की भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने मिलकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दोनों संस्थानों ने एयरोस्पेस-ग्रेड सेमीकंडक्टर चिप ‘IRIS’ (Indigenous RISCV Controller for Space Applications) का सफलतापूर्वक विकास और बूटिंग की है।
यह चिप SHAKTI प्रोसेसर पर आधारित है और इसका उपयोग IoT और कंप्यूट सिस्टम्स में किया जाएगा। इस उपलब्धि के साथ, भारत ने विदेशी सेमीकंडक्टर तकनीक पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
IRIS चिप का विकास और परीक्षण
ISRO Inertial Systems Unit (IISU), तिरुवनंतपुरम ने IIT मद्रास के साथ मिलकर इस चिप के स्पेसिफिकेशन तैयार किए और इसे विकसित किया। इस चिप को स्पेस मिशन में उच्च विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए फॉल्ट-टॉलरेंट इंटरनल मेमोरी और कई उन्नत फंक्शनल तथा परिधीय इंटरफेस मॉड्यूल्स जैसे कि CORDIC, WATCHDOG Timers और एडवांस्ड सीरियल बसों के साथ डिजाइन किया गया है।
चिप को अंतिम रूप देने से पहले कठोर सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर परीक्षण किए गए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह अंतरिक्ष मिशनों के लिए पूरी तरह उपयुक्त है।
पूरी तरह स्वदेशी निर्माण और असेंबली
IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कमकोटी ने बताया कि चिप के डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, मदरबोर्ड असेंबली और सॉफ़्टवेयर बूटिंग का पूरा कार्य भारत में ही किया गया।
यह परियोजना ‘Digital India RISC-V’ (DIRV) पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य घरेलू स्तर पर सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाले माइक्रोप्रोसेसर-आधारित उत्पादों का विकास करना है।
ISRO के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने IRIS कंट्रोलर के विकास को ‘मेक इन इंडिया’ पहल की बड़ी सफलता बताया।
सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (SCL), चंडीगढ़ के महानिदेशक कमलजीत सिंह ने कहा कि SCL, भारत की स्वावलंबन नीति के तहत शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स के साथ सहयोग जारी रखेगा ताकि निश्त्रिीय (niche) सेमीकंडक्टर उत्पादों में आत्मनिर्भरता प्राप्त की जा सके।