IIM संबलपुर के रंगावती सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन कल्चर एंड सस्टेनेबल मैनेजमेंट ने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली के सहयोग से एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य पश्चिमी ओडिशा के स्वतंत्रता संग्राम के अनजाने पहलुओं को उजागर करना था, जिसमें वीर सुरेंद्र साय के संघर्ष और कुडोपली हत्याकांड जैसे ऐतिहासिक विषयों को प्रमुखता से शामिल किया गया।
इसके अलावा, संगोष्ठी ने क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर और सतत प्रबंधन (Sustainable Management) की महत्ता पर भी चर्चा की।
संगोष्ठी के प्रमुख विषय और उद्देश्य
इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के तहत विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा की गई, जिनमें शामिल थे:
- स्वतंत्रता संग्राम के अज्ञात पहलू – पश्चिमी ओडिशा के संघर्षों को प्रकाश में लाने पर जोर।
- स्थानीय ज्ञान प्रणाली और सतत प्रबंधन – ऐतिहासिक धरोहरों को समकालीन संदर्भ में जोड़ना।
- बहु-विषयक शोध को बढ़ावा देना – सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के सतत विकास में योगदान देना।
इस आयोजन में शैक्षणिक शोधपत्रों, मुख्य वक्ताओं के व्याख्यान, और पेपर प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के अनछुए पहलुओं को ऐतिहासिक और आधुनिक प्रबंधन दृष्टिकोण से जोड़ने का प्रयास किया गया।
प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की उपस्थिति
इस संगोष्ठी में विश्वभर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
- प्रो. डॉ. फोएबे कौंडौरी (Phoebe Koundouri) – चेयर, UNSDSN ग्लोबल क्लाइमेट हब, ग्रीस।
- प्रो. ओटावियानो कैनुटो (Otaviano Canuto) – द ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन, पूर्व उपाध्यक्ष, विश्व बैंक, अमेरिका।
- डॉ. तामार बाग्राटिया (Tamar Bagratia) – त्बिलिसी स्टेट यूनिवर्सिटी, जॉर्जिया।
- प्रो. दिल रहुट (Dil Rahut) – उपाध्यक्ष, एशियन डेवलपमेंट बैंक इंस्टीट्यूट, जापान।
- प्रो. महादेव जैसवाल (Mahadeo Jaiswal) – निदेशक, IIM संबलपुर।
अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने IIM संबलपुर के रंगावती सेंटर फॉर एक्सीलेंस की गतिविधियों की सराहना की, जो संस्कृति और सतत प्रबंधन के अल्पज्ञात क्षेत्रों में शोध को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है।
IIM संबलपुर के निदेशक का वक्तव्य
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में IIM संबलपुर के निदेशक, प्रो. महादेव जैसवाल ने कहा:
“IIM संबलपुर में रंगावती सेंटर फॉर एक्सीलेंस की स्थापना, संस्कृति और सतत प्रबंधन पर उच्चस्तरीय शोध को समर्थन देने के लिए की गई है। यह केंद्र बुनकर व्यवसाय की समावेशिता, स्वतंत्रता संग्राम के अज्ञात पक्षों, तथा पश्चिमी ओडिशा में सतत प्रबंधन और सांस्कृतिक प्रवृत्तियों पर शोध कर रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) ने भी इस प्रकार के बहु-विषयक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया है, जिससे नए ज्ञान की सृजनात्मकता और व्यापक प्रसार को बढ़ावा मिलता है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह सेंटर उच्च गुणवत्ता वाले शोध, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, ज्ञान सृजन, प्रसार और प्रकाशन में सक्रिय रूप से संलग्न है। इस केंद्र की स्थापना भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से की गई है।
संगोष्ठी के प्रमुख सत्र
इस कार्यक्रम में दो प्रमुख सत्र आयोजित किए गए:
- “स्वतंत्रता संग्राम और संस्कृति”
- इस सत्र में डॉ. आलोक भोई, श्री बीरेंद्र झंकार, और डॉ. बिभुदत्त मिश्रा ने पश्चिमी ओडिशा में स्वतंत्रता संग्राम के कई अज्ञात पहलुओं पर चर्चा की।
- इन सत्रों में वीर सुरेंद्र साय के संघर्ष और अन्य क्षेत्रीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान पर प्रकाश डाला गया।
- “सांस्कृतिक धरोहर और सतत प्रबंधन”
- इस सत्र में श्री दुखी सेवक साहू, श्री राजेश झंकार, डॉ. श्रवण कुमार बाग, और श्री भवानी शंकर भोई ने स्थानीय धरोहरों और सतत प्रबंधन के आधुनिक संदर्भ पर अपने विचार साझा किए।
- इस चर्चा ने स्वदेशी ज्ञान प्रणाली के महत्व और इसके सतत विकास में योगदान को रेखांकित किया।
इसके अतिरिक्त, एक शोध रिपोर्ट और संकलन (Research Report & Compendium) भी जारी किया गया, जिससे संगोष्ठी की चर्चाओं को औपचारिक रूप दिया गया।
संगोष्ठी में भागीदारी और समापन
इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में 100 से अधिक विद्वानों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने भाग लिया। इसने स्वतंत्रता संग्राम के अज्ञात पहलुओं और सांस्कृतिक धरोहर की भूमिका पर विचार-विमर्श को प्रेरित किया।
संगोष्ठी का समन्वयन IIM संबलपुर के डॉ. सुजीत कुमार प्रसुथ ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हेमचंद्र पधान द्वारा प्रस्तुत किया गया।



