हर साल 25 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व मलेरिया दिवस (World Malaria Day) वैश्विक स्वास्थ्य जगत का एक महत्वपूर्ण आयोजन है, जिसका उद्देश्य मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ जागरूकता फैलाना और रोकथाम के प्रयासों को बढ़ावा देना है।
यह दिन न केवल सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को इस बीमारी की चुनौती से लड़ने के लिए एकजुट करता है, बल्कि आम जनता को भी इस गंभीर बीमारी के बारे में शिक्षित करता है।
मलेरिया आज भी दुनिया के अनेक देशों में एक विकराल स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है, खासकर अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे क्षेत्रों में।
मलेरिया: एक घातक परजीवी रोग
मलेरिया एक संक्रामक रोग है जो मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है, जो प्लास्मोडियम परजीवी को मानव शरीर में स्थानांतरित करता है।
इसके संक्रमण के लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, पसीना आना, सिरदर्द और कमजोरी शामिल हैं। यदि समय पर इलाज न हो, तो यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है, जिससे सेरेब्रल मलेरिया, कोमा, एनीमिया और मृत्यु तक हो सकती है। हर साल लगभग 200 करोड़ लोग मलेरिया के खतरे में रहते हैं, जिनमें पर्यटक भी शामिल होते हैं।
विश्व मलेरिया दिवस का महत्व
विश्व मलेरिया दिवस वैश्विक स्तर पर इस बात की याद दिलाता है कि मलेरिया के खिलाफ जंग अभी समाप्त नहीं हुई है। 2017 में इस रोग के 21.9 करोड़ से अधिक मामले सामने आए थे और 4.35 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
WMD का उद्देश्य है:
- मलेरिया की गंभीरता को उजागर करना
- इस रोग की रोकथाम और इलाज के प्रति जागरूकता बढ़ाना
- नई रणनीतियों, टीकों और शोध के महत्व पर ध्यान आकर्षित करना
- वैश्विक और स्थानीय स्तर पर नीति निर्माण को प्रभावित करना
COVID-19 महामारी के दौरान यह भी देखा गया कि जब स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होती हैं, तो मलेरिया जैसी बीमारियों की वापसी हो सकती है।
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में मलेरिया से होने वाली मृत्यु दर में 12% की वृद्धि दर्ज की गई।
इतिहास और विकास
विश्व मलेरिया दिवस की शुरुआत 2008 में हुई थी। इससे पहले इसे ‘अफ्रीका मलेरिया दिवस’ के नाम से मनाया जाता था, जिसकी शुरुआत 2001 में हुई थी।
2007 में, विश्व स्वास्थ्य सभा ने इसे वैश्विक पहचान देने का निर्णय लिया और इसे ‘विश्व मलेरिया दिवस’ के रूप में घोषित किया। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर मलेरिया के खात्मे के लिए एकजुट प्रयासों को प्रोत्साहित करना था।
मलेरिया की रोकथाम के उपाय
मलेरिया से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं:
- कीट विकर्षक (Repellent) का उपयोग करें जिसमें 20-35% DEET (डाईएथिल टोल्यूमाइड) हो।
- रात के समय पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
- सोते समय मच्छरदानी (Mosquito Net) का प्रयोग करें।
- बेडरूम में सोने से पहले कीटनाशक (Pyrethrin) का छिड़काव करें।
- घर के आसपास पानी जमा न होने दें, जिससे मच्छर न पनप सकें।
- पानी के टैंक और बर्तनों को ढक्कन से बंद रखें।
ये उपाय न केवल व्यक्तिगत स्तर पर मलेरिया से सुरक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि सामुदायिक स्तर पर इसके प्रसार को रोकने में भी सहायक होते हैं।
वैश्विक प्रयास और भविष्य की दिशा
मलेरिया के खात्मे के लिए दुनिया भर में टीकों, दवाओं और कीटनाशकों पर शोध हो रहा है। RTS,S/AS01 (Mosquirix) जैसे टीकों को अब कई देशों में प्रयोग किया जा रहा है।
WHO ने 2030 तक मलेरिया को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए ‘High Burden to High Impact’ (HBHI) नामक रणनीति अपनाई गई है।
भारत सरकार ने भी राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम (National Framework for Malaria Elimination) शुरू किया है, जिसका लक्ष्य 2030 तक भारत को मलेरिया मुक्त बनाना है।
विश्व मलेरिया दिवस हमें यह याद दिलाता है कि एकजुट प्रयासों से ही इस घातक बीमारी को हराया जा सकता है। समय पर पहचान, उचित इलाज और रोकथाम की रणनीतियां ही इस बीमारी को समाप्त करने की कुंजी हैं।
इस दिन का उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना नहीं, बल्कि एक ऐसा स्वास्थ्य-संस्कृति विकसित करना है जिसमें कोई भी मलेरिया से पीड़ित न हो।
“मलेरिया को हराएं – जीवन बचाएं।” यही है इस दिवस का मूल संदेश।



