विजयदशमी आज | जानिए पूरी जानकारी | 2YoDo विशेष

दशहरे पर पूरे दिनभर ही मुहूर्त होते हैं इसलिए सारे बड़े काम आसानी से संपन्न किए जा सकते हैं। यह एक ऐसा मुहूर्त वाला दिन है जिस दिन बिना मुहूर्त देखे आप किसी भी नए काम की शुरुआत कर सकते हैं।

आश्विन शुक्ल दशमी को मनाए जाने वाला यह त्योहार ‘विजयदशमी’ या ‘दशहरा’ के नाम से प्रचलित है। यह त्योहार वर्षा ऋतु की समाप्ति का सूचक है। इन दिनों चौमासे में स्थगित कार्य फिर से शुरू किए जा सकते हैं। 

दशहरे के दिन भगवान श्रीराम की पूजा का दिन भी है। इस दिन घर के दरवाजों को फूलों की मालाओं से सजाया जाता है। घर में रखे शस्त्र, वाहन आदि भी पूजा की जाती है। दशहरे का यह त्योहार बहुत ही पावनता के साथ संपन्न किया जाता है। उसके बाद रावण दहन किया जाता है।

नवरात्रि के 9 दिनों तक मां दुर्गा की आराधना करने के बाद भगवान श्रीराम ने दशमी के दिन ही लंकापति रावण का वध किया था, तभी से दशहरा पर्व मनाया जाता है।

वैसे तो रावण बहुत परम ज्ञानी पंडित था, लेकिन अहंकार भाव के चलते उसने सीता का हरण किया और लंका ले गया और उन्हें अशोक वाटिका में कैद करके रखने का दुस्साहस किया था

जिसके परिणामस्वरूप भगवान श्रीराम हनुमानजी की सहायता से राक्षसराज रावण को काबू करने में सफल हो गए थे।

उन्होंने रावण को युद्ध में परास्त करके उसे मुक्ति देने का महान कार्य करके दशमी के दिन को पावन कर दिया।

श्रीराम ने रावण के अहंकार को चूर-चूर करके दुनिया के लिए भी एक बहुत मूल्यवान शिक्षा प्रदान की जिसकी हम सभी को रोजमर्रा के जीवन में बहुत जरूरत है।

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श्रीराम की यही सीख मानवीय जीवन में बहुउपयोगी सिद्ध होगी। हमें भी अपने जीवन में अहंकार, लोभ, लालच और अत्याचारी वृत्तियों को त्यागकर क्षमारूपी बनकर जीवन जीना चाहिए।

भगवान श्रीराम की यह सीख बहुत ही सच्ची और हमें मोक्ष प्राप्ति की ओर ले जाने वाली है।

जानिए दशहरे की कुछ खास बातें 
  • भगवान राम-सीता और हनुमान की पूजा-अर्चना की जाती है।
  • विजयदशमी पर शमी वृक्ष का पूजन किया जाता है।
  • रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र से भगवान शिव की आराधना की जाती है।
  • इस दिन करोड़ों रुपए के फूलों की बिक्री होती है और लोग अपने घर के दरवाजे फूलों की मालाओं से सजाकर उत्सव मनाते हैं।
  • इस दिन लोग अपनी-अपनी क्षमतानुसार सोना-चांदी, वाहन, कपड़े तथा बर्तनों की खरीददारी करते हैं।
  • इस दिन देशभर में रावण के पुतले बनाकर जगह-जगह जलाए जाते हैं।
  • दशहरे के दिन शहर-कस्बों और गांवों में श्रीराम-सीता स्वयंवर प्रसंग, रामभक्त हनुमान का लंकादहन कार्यक्रम, रामलीला का बखान करते हुए राम-रावण युद्ध के साथ रावण दहन किया जाता है।
  • इस दिन खासतौर पर गिलकी के पकौड़े और गुलगुले (मीठे पकौड़े) बनाने का प्रचलन है।
  • रावण दहन के बाद एक-दूसरे के घर जाकर, गले मिलकर, चरण छूकर बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है और साथ ही शमी पत्तों को एक-दूसरे को बांटा जाता है। यह पावन त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है।

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