सौरमंडल के बाहरी ग्रहों—बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण—की कक्षाओं में अनियमितताएं लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बनी हुई हैं। हाल ही में, एक नए शोध ने इस रहस्य को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि अरबों साल पहले एक रहस्यमय खगोलीय वस्तु, जिसका द्रव्यमान बृहस्पति से आठ गुना अधिक था, सौरमंडल में प्रवेश कर गई और सूर्य के बेहद करीब से गुजरी।
इस घटना ने चारों बाहरी ग्रहों की कक्षाओं को बदल दिया, जिससे उनकी वर्तमान कक्षाएं बनीं।
क्या है यह रहस्यमय वस्तु?
यह शोध arXiv प्रीप्रिंट डेटाबेस में प्रकाशित हुआ है और इसे एरिजोना विश्वविद्यालय के ग्रह वैज्ञानिक रेणु मल्होत्रा की अगुवाई में किया गया है। शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर सिमुलेशन का उपयोग करके यह जांच की कि कैसे एक अंतरतारकीय वस्तु का सौरमंडल में प्रवेश करना और सूर्य के करीब से गुजरना ग्रहों की कक्षाओं को प्रभावित कर सकता है।
शोध में कुल 50,000 सिमुलेशन किए गए, जिनमें यह पाया गया कि लगभग 1% मामलों में, एक अंतरतारकीय वस्तु ने ग्रहों की कक्षाओं को इस तरह प्रभावित किया, जो वर्तमान अवलोकनों से मेल खाता है।
सूर्य के करीब से गुजरना
Live Science की रिपोर्ट के अनुसार, मल्होत्रा ने बताया कि पिछले मॉडल ग्रहों की कक्षाओं में मामूली विचलन को पूरी तरह से समझाने में असमर्थ थे। नए सिमुलेशन से पता चला कि सबसे सटीक परिणाम तब मिलता है जब एक वस्तु, जिसका द्रव्यमान बृहस्पति से आठ गुना अधिक है, सूर्य से केवल 1.69 खगोलीय इकाई (AU) की दूरी से गुजरती है।
यह दूरी मंगल की कक्षा (लगभग 1.5 AU) के बेहद करीब है, जो सौरमंडल के आंतरिक भाग में एक नाटकीय घटना का संकेत देती है।
भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना
शोधकर्ताओं का मानना है कि अंतरतारकीय वस्तुएं, जैसे ब्राउन ड्वार्फ और ग्रहों के आकार की वस्तुएं, ब्रह्मांड में अपेक्षाकृत आम हैं। इसलिए, ऐसी घटनाएं पूर्ण आकार के तारों के साथ होने वाली घटनाओं की तुलना में अधिक संभावित हैं।
हालांकि यह शोध अभी सहकर्मी-समीक्षा से नहीं गुजरा है, लेकिन इसके निष्कर्ष बताते हैं कि एक अंतरतारकीय वस्तु ने सौरमंडल की संरचना को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो सकती है।
यह शोध सौरमंडल के इतिहास और इसकी संरचना को समझने में एक नया आयाम जोड़ता है। यह संभावना है कि अरबों साल पहले एक रहस्यमय वस्तु ने सौरमंडल में प्रवेश करके ग्रहों की कक्षाओं को बदल दिया, जिससे उनकी वर्तमान स्थिति बनी।
यह शोध न केवल सौरमंडल के विकास को समझने में मदद कर सकता है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावनाओं को भी उजागर कर सकता है।




