हालिया शोध ने यह संकेत दिया है कि प्रारंभिक मानव पूर्वज, विशेष रूप से ऑस्ट्रालोपिथेकस अफ़्रिकनस, मांस की तुलना में पौधों पर अधिक निर्भर थे। उनके जीवाश्म दांतों से प्राप्त प्रमाण, खासकर दांतों की तामचीनी में पाए गए रासायनिक तत्व, यह बताते हैं कि ये पूर्वज मुख्य रूप से शाकाहारी थे और ऊर्जा के लिए अन्य गैर-मांस स्रोतों पर निर्भर रहते थे।
शोध की प्रक्रिया: जीवाश्म दांतों का विश्लेषण
वैज्ञानिक पत्रिका साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, शोधकर्ताओं ने दक्षिण अफ्रीका की स्टर्कफोंटिन गुफाओं से ऑस्ट्रालोपिथेकस अफ़्रिकनस के जीवाश्म दांतों का विश्लेषण किया।
- कुल नमूने: 43 जीवाश्म
- विशेष नमूने: सात व्यक्तियों के दांत
इन दांतों की तामचीनी में नाइट्रोजन समस्थानिक (Isotopic) अनुपात का अध्ययन किया गया। इन आंकड़ों की तुलना अन्य विलुप्त स्तनधारियों और आधुनिक अफ्रीकी स्तनधारियों के साथ की गई।
परिणाम: अध्ययन से पता चला कि इन पूर्वजों के आहार में मांस की उपस्थिति नगण्य थी।
मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर केमिस्ट्री की भू-रसायनज्ञ डॉ. टीना ल्यूडेके ने साइंस न्यूज़ को बताया कि यह खोज प्रारंभिक मानव पूर्वजों के व्यवहार और अनुकूलन को समझने में सहायक है।
- ऑस्ट्रालोपिथेकस अफ़्रिकनस ने बाइपेडलिज्म (दो पैरों पर चलने की क्षमता), छोटे थूथन, और सवाना जैसी पारिस्थितिकीय परिस्थितियों में रहने की क्षमता विकसित की।
- यह सब मांस-आधारित आहार से पहले हुआ, जो यह दर्शाता है कि उनकी सफलता के पीछे मुख्य भूमिका शाकाहारी आहार और अन्य ऊर्जा स्रोतों की थी।
मांस के अलावा अन्य प्रोटीन स्रोतों की संभावना
डॉ. ल्यूडेके के अनुसार, हालांकि मांस का सेवन पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता, लेकिन यह मुख्य आहार का हिस्सा नहीं था।
- ऊर्जा स्रोत:
- ऑस्ट्रालोपिथेकस अफ़्रिकनस कभी-कभी मांस या ऊर्जा-समृद्ध दीमक का सेवन कर सकते थे।
- दीमक, एक विश्वसनीय भोजन स्रोत, उनके आहार में शामिल हो सकता था, लेकिन इससे नाइट्रोजन समस्थानिक में बड़ा परिवर्तन नहीं हुआ।
- आधुनिक एप्स (गोरिल्ला और चिंपैंजी) के दीमक पकड़ने के व्यवहार से यह संभावना और मजबूत होती है।
यह शोध मानव विकास के क्रम में आहार परिवर्तन के महत्व को उजागर करता है।
- शाकाहारी भोजन से प्रोटीन-युक्त मांस की ओर संक्रमण के समय को समझने में मदद मिलेगी।
- इस शोध के निष्कर्ष भविष्य में अन्य मानव प्रजातियों के आहार व्यवहार पर गहन अध्ययन का मार्ग प्रशस्त करेंगे।



