5 सितंबर 2025 (शुक्रवार) को भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि पर शुक्र प्रदोष व्रत रखा जाएगा। यह व्रत विशेष संयोग में आ रहा है क्योंकि आज सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को धन-समृद्धि, सुख-शांति और पापों से मुक्ति मिलती है। शिव-पार्वती की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
व्रत की तिथि व समय
त्रयोदशी तिथि का आरंभ 5 सितंबर को सुबह में 4 बजकर 9 मिनट पर होगा और त्रयोदशी तिथि समाप्त होगी 6 तारीख की मध्य रात्रि 3 बजकर 14 मिनट पर होगी। शास्त्रों में विधान है कि त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल में होने पर ही प्रदोष व्रत किया जाता है।
ऐसे में 5 सितंबर को शुक्रवार के दिन प्रदोष व्रत रखा जाएगा। शुक्रवार के दिन प्रदोष व्रत होने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी है।। इसलिए इस व्रत का महत्व और भी अधिक रहेगा।
- त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 5 सितंबर प्रातः 4:09 बजे
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 6 सितंबर मध्यरात्रि 3:14 बजे
चूंकि 5 सितंबर को त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल में है और शुक्रवार का दिन है, इसलिए यह व्रत शुक्र प्रदोष व्रत कहलाएगा।
शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत के प्रभाव से दांपत्य जीवन खुशहाल होता है। शुक्र प्रदोष व्रत करने से भौतिक, सुख साधनों में भी वृद्धि होती है। वहीं, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं। प्रदोष व्रत में रुद्राभिषेक कराने के भी काफी फायदा है।
- पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत से दांपत्य जीवन सुखी व सौहार्दपूर्ण होता है।
- भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है और आर्थिक संपन्नता आती है।
- स्वास्थ्य संबंधी कष्ट दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है।
- इस दिन किया गया रुद्राभिषेक विशेष फलदायी माना जाता है।
शुक्र प्रदोष व्रत पूजा विधि
- सुबह स्नान करके सूर्यदेव को अर्घ्य दें और व्रत का संकल्प लें।
- घर के पूजा स्थान को स्वच्छ करके भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग की स्थापना करें।
- प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में पूजा करें।
- सबसे पहले घी का दीपक जलाएं और शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें।
- शिवलिंग पर जनेऊ अर्पित करें, माता पार्वती को श्रृंगार का सामान व लाल चुनरी अर्पित करें।
- शुक्र प्रदोष व्रत कथा पढ़ें, फिर शिव चालीसा का पाठ और आरती करें।
- पूजा के बाद भगवान शिव को प्रसाद अर्पित करें और परिवार व भक्तजनों में प्रसाद बांटें।
- अंत में व्रत का पारण करें।
शुक्रवार का प्रदोष व्रत भौतिक सुखों, वैवाहिक जीवन की मधुरता और स्वास्थ्य लाभ के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। भाद्रपद मास के इस पहले प्रदोष व्रत में सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग इसे और भी प्रभावशाली बना रहा है।



