श्रावण मास में आने वाले सोमवार का व्रत, भगवान शिव की कृपा पाने का एक अत्यंत प्रभावशाली साधन है। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि मानसिक शांति, रोगों से मुक्ति, वैवाहिक सुख और मोक्ष का द्वार भी खोलता है। सावन माह में चार सोमवार आते हैं जिन्हें “श्रावण सोमवारी” कहा जाता है।
इन व्रतों का विशेष महत्व है क्योंकि यह मास स्वयं शिव को समर्पित होता है और ऐसी मान्यता है कि इस मास में शिवजी कैलाश से धरती पर आते हैं।
सावन 2025 की अवधि और सोमवार तिथियाँ
- सावन आरंभ: 11 जुलाई 2025
- सावन समाप्ति: 9 अगस्त 2025
चार सोमवारों की तिथियाँ:
- पहला सोमवार – 14 जुलाई 2025
- दूसरा सोमवार – 21 जुलाई 2025
- तीसरा सोमवार – 28 जुलाई 2025
- चौथा सोमवार – 4 अगस्त 2025
शुभ मुहूर्त (14 जुलाई 2025)
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:16 से 5:04 बजे
- अभिजीत मुहूर्त: 11:59 AM – 12:55 PM
- पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय: 11:38 AM – 12:32 PM
- अमृत काल: रात 11:21 PM से 12:55 AM (15 जुलाई)
सावन सोमवार व्रत का महत्व
- धार्मिक दृष्टिकोण से: शिवजी को प्रसन्न करने का सर्वश्रेष्ठ समय।
- आध्यात्मिक लाभ: आत्मबल में वृद्धि, चित्त की एकाग्रता और ध्यान में सहायता।
- वैवाहिक सुख: विशेष रूप से कन्याओं द्वारा योग्य वर की प्राप्ति हेतु व्रत रखा जाता है।
- सद्गति की प्राप्ति: यह व्रत मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
सावन सोमवार व्रत पूजा विधि
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजन स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
- पूर्व दिशा की ओर मुख करके शिवलिंग को स्थापित करें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी व गंगाजल से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, आक, धतूरा, सफेद फूल, भस्म, चंदन आदि अर्पित करें।
- ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करें या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- व्रत कथा का पाठ करें।
- पूजा के पश्चात आरती करें और क्षमा प्रार्थना करें।
- प्रसाद सभी को वितरित करें।
सावन व्रत नियम
- सात्विक भोजन करें।
- व्रत के दौरान झूठ, चुगली, क्रोध, तामसिक भोजन से बचें।
- दूसरों के प्रति दया, सहानुभूति और शुद्ध विचार रखें।
- शिव मंदिर जाकर रुद्राभिषेक करें।
क्यों रखें सिर्फ पहला और आखिरी व्रत?
यदि कोई श्रद्धालु पूरे सावन मास व्रत नहीं रख सकता तो उसे केवल पहला और अंतिम सोमवार का व्रत अवश्य करना चाहिए। यह भी समान रूप से पुण्यदायी माना गया है और शिव कृपा को प्राप्त करता है।
शिव मंत्र जो व्रत के दौरान जपें
- ॐ नमः शिवाय
- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥



