कैसे नासा ने बाढ़ के बावजूद सौर डेटा को बचाया? जानकर हैरान रह जाएंगे | Details Inside

नासा के सोलर डायनामिक्स ऑब्ज़र्वेटरी (SDO) और इंटरफेस रीजन इमेजिंग स्पेक्ट्रोग्राफ (IRIS) स्पेसक्राफ्ट के संचालन को सफलतापूर्वक बहाल कर दिया गया है। यह डेटा आउटेज स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में नवंबर 2024 में आई बाढ़ के कारण हुआ था, जिससे लगभग 20 प्रतिशत डेटा प्रबंधन प्रणाली क्षतिग्रस्त हो गई थी। हालांकि, इस दौरान स्पेसक्राफ्ट ने सामान्य रूप से काम किया, और वैज्ञानिक डेटा की निरंतरता बनी रही।

बाढ़ से नुकसान और प्रारंभिक चुनौतियां

स्पेस डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्थित जॉइंट साइंस ऑपरेशन्स सेंटर (JSOC) बाढ़ के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ। यह सेंटर SDO और IRIS से डेटा को संसाधित और वितरित करने का काम करता है।

इस घटना के बाद SDO के दो महत्वपूर्ण उपकरणों—हेलियोसीस्मिक एंड मैग्नेटिक इमेजर (HMI) और एटमॉस्फेरिक इमेजिंग एरे (AIA)—के आर्काइव्स तक पहुंच अस्थायी रूप से बाधित हो गई। ये उपकरण सौर गतिविधियों का अध्ययन करने और विभिन्न प्रकाश तरंगदैर्ध्य (wavelengths) में डेटा कैप्चर करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

सिस्टम बहाली के प्रयास

JSOC टीम के अनुसार, 20 दिसंबर 2024 तक आंशिक रूप से बहाल किए गए डेटाबेस सर्वर ने सीमित डेटा प्रोसेसिंग को सक्षम किया। इस बीच, बैकअप सर्वरों को तैयार किया गया है, और क्षतिग्रस्त सिस्टम को जल्द ही बदला जाएगा।

हालांकि, आर्काइव किए गए डेटा को क्षतिग्रस्त डिस्क ड्राइव से पुनर्प्राप्त करना अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। टीम का प्राथमिक लक्ष्य डेटा भंडारण और प्रोसेसिंग क्षमता को पूरी तरह बहाल करना है।

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वैज्ञानिक कार्यों की निरंतरता

2010 में लॉन्च हुआ SDO और 2013 से संचालित IRIS स्पेसक्राफ्ट सौर गतिविधियों और उनके पृथ्वी पर प्रभावों का अध्ययन करते हैं। बाढ़ के दौरान डेटा सेंटर की सेवाएं बाधित हुईं, लेकिन स्पेसक्राफ्ट ने नियमित रूप से डेटा प्रसारित करना जारी रखा।

इससे वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए डेटा निरंतर संरक्षित रहा। अब टीम का ध्यान बाढ़ के दौरान और उसके बाद एकत्रित डेटा को प्रोसेस करने और सिस्टम की मरम्मत पर केंद्रित है।

भविष्य में पूर्ण बहाली की संभावनाएं

आर्काइव डेटा की पुनर्प्राप्ति के लिए आवश्यक उपकरणों की शिपमेंट से बहाली प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। वैज्ञानिकों का मानना है कि JSOC सिस्टम के पूरी तरह ऑनलाइन होने के बाद नियमित अनुसंधान गतिविधियां जल्द ही फिर से शुरू होंगी।

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