हिंदू धर्म में पापमोचिनी एकादशी का विशेष महत्व है। यह पर्व चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने तथा एकादशी का व्रत रखने से साधक के सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
विष्णु पुराण के अनुसार, इस व्रत से जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप धुल जाते हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
पापमोचिनी एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त
- एकादशी तिथि आरंभ: 25 मार्च, सुबह 05:05 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 26 मार्च, रात 03:45 बजे
- पापमोचिनी एकादशी तिथि: 25 मार्च (सामान्य) और 26 मार्च (वैष्णव)
पारण समय (26 मार्च):
दोपहर 01:41 बजे से शाम 04:08 बजे तक
पापमोचिनी एकादशी का महत्व
- पापों से मुक्ति:
इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। - भगवान विष्णु की कृपा:
इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक को धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। - दुर्लभ योग:
इस बार पापमोचिनी एकादशी पर शिववास योग और सिद्ध योग का संयोग बन रहा है, जो इस व्रत का महत्व और बढ़ा देता है।
पापमोचिनी एकादशी पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें:
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। - भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा:
- भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को गंगाजल से स्नान कराएं।
- पीले फूल, तुलसी दल, फल और मिठाई अर्पित करें।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
- दान करें:
पूजा के बाद गरीबों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करें। - पारण:
अगले दिन (26 मार्च) दोपहर 01:41 से 04:08 बजे के बीच स्नान-ध्यान करके भगवान विष्णु की पूजा करें और फिर अन्न ग्रहण कर व्रत का पारण करें।
विशेष उपाय
- तुलसी पूजा:
इस दिन तुलसी के पौधे की विशेष पूजा करें और उसके नीचे दीपक जलाएं। - विष्णु सहस्रनाम का पाठ:
भगवान विष्णु के सहस्रनाम का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है। - श्रीमद्भागवत गीता का पाठ:
इस दिन गीता के कुछ अध्यायों का पाठ करने से मन को शांति मिलती है।
पापमोचिनी एकादशी का व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और उसे भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है। यह दिन आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति का सुनहरा अवसर प्रदान करता है।
आइए, इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु की आराधना करें और अपने जीवन को पवित्र एवं सुखमय बनाएं।



