नासा के OSIRIS-REx मिशन द्वारा पृथ्वी पर लाए गए बेन्नू क्षुद्रग्रह के नमूने में ऐसे अणु और खनिज पाए गए हैं, जो जैविक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अध्ययन में एमिनो एसिड, न्यूक्लियोबेस और अमोनिया जैसी कार्बनिक यौगिकों की खोज की गई है, जो जीवन के निर्माण के लिए आवश्यक माने जाते हैं।
इसके अलावा, नमूने में नमकीन पानी से बने खनिज भी पाए गए हैं, जो दर्शाते हैं कि प्रारंभिक सौरमंडल में जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ मौजूद थीं। इन निष्कर्षों से यह संभावना भी बढ़ जाती है कि पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों या उपग्रहों पर भी जीवन की उत्पत्ति संभव हो सकती है।
बेन्नू से मिले अहम प्रमाण
नेचर और नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, बेन्नू के नमूने में 20 आवश्यक एमिनो एसिड में से 14 की पहचान की गई है। इसके साथ ही, डीएनए और आरएनए में मौजूद पाँचों न्यूक्लियोबेस भी इस नमूने में पाए गए हैं। वैज्ञानिकों को अमोनिया और फॉर्मल्डिहाइड जैसे तत्व भी मिले हैं, जो जटिल कार्बनिक अणुओं के निर्माण में महत्वपूर्ण होते हैं।
इससे पहले भी उल्कापिंडों में ऐसे यौगिकों की खोज की गई थी, लेकिन यह पहली बार है जब अंतरिक्ष से सीधे एकत्र किए गए किसी स्वच्छ नमूने में इनकी मौजूदगी दर्ज की गई है। इससे यह सिद्ध होता है कि क्षुद्रग्रहों की सामग्री पृथ्वी पर जीवन के मूलभूत तत्वों के निर्माण में योगदान कर सकती है।
नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डैनी ग्लेविन ने कहा कि बेन्नू नमूने की विशुद्ध प्रकृति ने वैज्ञानिकों को उन यौगिकों का पता लगाने में मदद की, जो पृथ्वी पर आते ही परिवर्तित या नष्ट हो सकते थे।
पानी और प्राचीन रासायनिक प्रक्रियाओं के प्रमाण
खनिज विश्लेषण से पता चला कि नमूने में कैल्साइट, हैलाइट और सिल्वाइट जैसे वाष्पीकरणशील खनिज मौजूद हैं, जो लंबे समय तक पानी की उपस्थिति का संकेत देते हैं। स्मिथसोनियन नेशनल म्यूज़ियम ऑफ़ नेचुरल हिस्ट्री के टिम मैककॉय और लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम की सारा रसेल द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि ये खनिज खारे पानी के वाष्पीकरण के दौरान बने होंगे।
यह खोज महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि पहले केवल कुछ उल्कापिंडों में इस तरह के खनिज पाए गए थे, लेकिन यह पहली बार है जब अंतरिक्ष से प्राप्त किसी नमूने में इनकी पूरी श्रृंखला दर्ज की गई है। वैज्ञानिकों ने ट्रोना नामक एक दुर्लभ खनिज की भी खोज की, जो अब तक किसी भी अंतरिक्षीय नमूने में नहीं मिला था।
क्या जीवन के मूल तत्व अंतरिक्ष से आए?
अध्ययन में पाया गया कि बेन्नू के नमूने में मौजूद एमिनो एसिड में बाएँ और दाएँ घूर्णन करने वाले अणुओं की बराबर मात्रा थी, जबकि पृथ्वी पर पाए जाने वाले एमिनो एसिड मुख्य रूप से बाएँ घूर्णन वाले होते हैं। यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि पृथ्वी पर जीवन में यह असमानता कैसे आई।
OSIRIS-REx मिशन के प्रमुख वैज्ञानिक जेसन ड्वोर्किन ने कहा कि यह अध्ययन सौरमंडल की रसायनशास्त्र को समझने में मदद करता है, लेकिन यह अभी भी एक रहस्य है कि पृथ्वी पर ही जीवन क्यों विकसित हुआ।
भविष्य की खोजों के लिए नए संकेत
OSIRIS-REx मिशन को नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर ने संचालित किया था, जिसमें यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना, लॉकहीड मार्टिन स्पेस, कनाडा स्पेस एजेंसी और जापान की JAXA जैसी संस्थाएँ शामिल थीं। नमूने का विश्लेषण नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में किया जा रहा है, जहां वैज्ञानिक आगे भी इसके तत्वों का अध्ययन कर सौरमंडल में जीवन की संभावनाओं पर शोध करेंगे।
बेन्नू से मिले नमूने इस बात का प्रमाण देते हैं कि अंतरिक्षीय पिंडों में जीवन के निर्माण के लिए आवश्यक तत्व मौजूद हो सकते हैं। यह खोज भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है, जो यह निर्धारित करने में मदद कर सकती है कि क्या पृथ्वी ही एकमात्र ग्रह है, जहाँ जीवन संभव हुआ, या फिर ब्रह्मांड में कहीं और भी जीवन की संभावना है।



