मंगल ग्रह की सतह पर मौजूद “मार्टियन डाइकोटॉमी” (उत्तर के निम्नभूमि और दक्षिण के उच्चभूमि के बीच का अंतर) दशकों से वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बनी हुई थी। NASA के InSight लैंडर से मिले नवीनतम भूकंपीय डेटा ने इस रहस्य को हल करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।
मार्टियन डाइकोटॉमी का रहस्य क्या है?
मंगल ग्रह की सतह को दो भागों में विभाजित किया गया है:
- उत्तरी निम्नभूमि (Northern Lowlands): जहां ऊंचाई कम है।
- दक्षिणी उच्चभूमि (Southern Highlands): जहां ऊंचाई और क्रस्ट की मोटाई अधिक है।
यह संरचनात्मक अंतर ग्रह के आंतरिक प्रक्रियाओं या बाहरी प्रभावों, जैसे क्षुद्रग्रह टकराव, का परिणाम हो सकता है।
InSight लैंडर से मिली नई जानकारी
InSight लैंडर ने मंगल की सतह पर भूकंपीय तरंगों को मापा और उनके डेटा का विश्लेषण किया।
- भूकंपीय तरंगों के अध्ययन से पता चला कि दक्षिणी उच्चभूमि के नीचे का मेंटल उत्तरी निम्नभूमि की तुलना में अधिक गर्म है।
- भूकंपीय ऊर्जा दक्षिणी क्षेत्रों में तेजी से समाप्त हो गई, जो यह दर्शाता है कि वहां मेंटल अधिक सक्रिय रहा है।
प्राचीन टेक्टोनिक गतिविधियां: मुख्य कारण
वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल ग्रह के प्रारंभिक इतिहास में हुई टेक्टोनिक प्लेट्स की गतिविधियां और ज्वालामुखीय प्रक्रियाएं इस विभाजन का कारण हो सकती हैं।
- दक्षिणी उच्चभूमि में मैग्मा ऊपर की ओर धकेला गया।
- जबकि उत्तरी क्षेत्र में मैग्मा ग्रह के केंद्र की ओर डूब गया।
- यह प्रक्रिया क्रस्ट की मोटाई और मेंटल तापमान में अंतर का कारण बनी।
डॉ. बेंजामिन फर्नांडो के अनुसार, यह खोज इस विचार को बल देती है कि मंगल ग्रह की संरचना आंतरिक प्रक्रियाओं से प्रभावित हुई है।
बाहरी प्रभाव भी एक संभावना
हालांकि यह अध्ययन आंतरिक प्रक्रियाओं का समर्थन करता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने बाहरी प्रभाव, जैसे कि क्षुद्रग्रह टकराव, को भी पूरी तरह से खारिज नहीं किया है।
- मंगल की सतह पर बड़े-बड़े गड्ढे और क्षुद्रग्रहों के टकराव के निशान इस संभावना को दर्शाते हैं।
- इन सभी संभावनाओं को समझने के लिए और अधिक भूकंपीय डेटा और उन्नत मॉडलों की आवश्यकता है।
भविष्य के अध्ययन की दिशा
मंगल ग्रह की भूगर्भीय संरचना को बेहतर तरीके से समझने के लिए:
- और अधिक भूकंपीय उपकरण मंगल पर भेजे जाएंगे।
- ग्रह के आंतरिक भाग की गतिविधियों पर गहन अध्ययन किया जाएगा।
- नए डेटा से यह तय किया जाएगा कि मंगल की संरचना पर आंतरिक प्रक्रियाओं का अधिक प्रभाव था या बाहरी टकरावों का।



