सहजन: पेड़ नहीं, मानव जीवन के लिए कुदरत का जीता-जागता चमत्कार | जानिए पूरी जानकारी | 2YoDo विशेष

सहजन, सेंजन, मुनगा या ड्रमस्टिक… नाम चाहे जो भी हो, बात एक ही है – यह पेड़ सिर्फ सब्ज़ी देने वाला पौधा नहीं, बल्कि पोषण, आयुर्वेद, खेती, पशुपालन और त्वचा–स्वास्थ्य तक, हर क्षेत्र में अपना कमाल दिखाने वाला बहुमूल्य प्राकृतिक वरदान है।

आयुर्वेदिक ग्रंथों में सहजन को बहु-औषधि के रूप में वर्णित किया गया है, और आज के वैज्ञानिक दौर में भी इसके कई गुणों की पुष्टि शोधों में की जा रही है। बताया जाता है कि सहजन के अलग-अलग हिस्सों में लगभग 300 से अधिक रोगों की रोकथाम से जुड़े गुण पाए जाते हैं।

कहा जाता है कि सहजन में –

  • करीब 92 प्रकार के मल्टीविटामिन,
  • 46 तरह के एंटीऑक्सीडेंट,
  • 36 प्रकार के दर्द निवारक गुण,
  • और 18 तरह के अमीनो एसिड पाए जाते हैं।

यानी एक ही पेड़ में पोषण, रोग-प्रतिरोधक क्षमता, ऊर्जा, दर्द से राहत और सौंदर्य सब कुछ समाया हुआ है।

सहजन: कम देखभाल, ज़्यादा फायदा

सहजन का पेड़ किसी भी सामान्य भूमि में उग सकता है और बहुत कम देखरेख मांगता है।

  • दक्षिण भारत में इसके पेड़ साल भर फलियाँ देते हैं और सांभर व अन्य व्यंजनों में बड़े चाव से इस्तेमाल होते हैं।
  • उत्तर भारत में यह साल में एक बार फलियाँ देता है – सर्दियों के बाद इसकी फूल–सब्ज़ी और फिर फली की सब्ज़ी खूब पसंद की जाती है।
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सहजन के पेड़ की विशेषता यह है कि:

  • इसकी पत्तियाँ पशुओं के चारे के रूप में दी जाएँ तो दूध और वजन, दोनों में वृद्धि देखी गई है।
  • पत्तियों के रस को पानी में मिलाकर फसल पर छिड़कने से उपज बढ़ने की भी बात कही जाती है

इस तरह एक ही पेड़ – इंसान, पशु और खेत तीनों के लिए उपयोगी है।

सहजन का पोषण प्रोफाइल: सुपरफूड से भी आगे

सहजन के फलों, पत्तियों और बीजों में भरपूर पोषक तत्व पाए जाते हैं। दिए गए आँकड़ों के अनुसार सहजन में –

  • विटामिन C – संतरे से लगभग 7 गुना अधिक
  • विटामिन A – गाजर से लगभग 4 गुना अधिक
  • कैल्शियम – दूध से लगभग 4 गुना अधिक
  • पोटेशियम – केले से लगभग 3 गुना अधिक
  • प्रोटीन – दही की तुलना में लगभग 3 गुना अधिक

साथ ही इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन A, C और B–कॉम्प्लेक्स की भी अच्छी मात्रा बताई जाती है।

यही कारण है कि कई पोषण विशेषज्ञ इसे नेचुरल मल्टीविटामिन पेड़ के रूप में भी देखते हैं (हालाँकि किसी भी गंभीर रोग में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना सही नहीं, डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है)।

सहजन के औषधीय उपयोग: परंपरा जो आज भी असरदार मानी जाती है

आयुर्वेद और लोक–चिकित्सा में सहजन के तमाम हिस्सों का उपयोग अलग–अलग तरह से किया जाता रहा है।

फली – वात, पाचन और जोड़ों के लिए लाभकारी मानी जाती है

सहजन की ताज़ी फलियों की सब्ज़ी –

  • जोड़ों के दर्द,
  • वात रोग,
  • और लंबे समय से चले आ रहे दर्दों में लाभकारी मानी जाती है।

फली का जूस उच्च रक्तचाप में लाभ के लिए परंपरागत रूप से उपयोग किया जाता है, लेकिन BP या हार्ट के रोगियों को इसे अपनाने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

पत्ती – दर्द, सूजन और पोषण के लिए

  • पत्ती का काढ़ा गठिया, शियाटिका, वायु विकार जैसे रोगों में परंपरागत रूप से दिया जाता है।
  • पत्तों की लुगदी सरसों के तेल में पकाकर मोच वाली जगह पर लगाने से आराम मिलना बताया जाता है।
  • कोमल पत्तों का साग कब्ज में आराम देने वाला माना जाता है।
  • पत्तियों का रस बच्चों के पेट के कीड़े और उल्टी-दस्त में भी परंपरागत रूप से उपयोग किया जाता है (लेकिन बच्चों में कोई भी घरेलू प्रयोग डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए)।
  • कुछ लोग वजन कम करने के लिए भी सहजन के पत्तों का उपयोग करते हैं, क्योंकि माना जाता है कि यह मेटाबॉलिज़्म को सपोर्ट करता है।
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जड़ और छाल – दर्द, पथरी व वात विकारों में

  • जड़ का काढ़ा सेंधा नमक और हींग के साथ परंपरागत रूप से
    • मिर्गी के दौरे,
    • वायु विकार,
    • पित्ताशय की पथरी
      में लाभकारी माना गया है।
  • छाल का काढ़ा शियाटिका, गठिया और यकृत विकारों में भी उपयोगी माना जाता है।

फिर से ध्यान रहे – ये आयुर्वेदिक/लोक–मान्यताएँ हैं, गंभीर रोगों में इन्हें मुख्य इलाज नहीं, सहयोगी उपाय के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

कान, दांत, त्वचा और घाव में उपयोग

  • पत्तों का रस कान में डालने से दर्द में राहत की परंपरागत मान्यता है।
  • छाल के काढ़े से कुल्ला करने से दांतों के कीड़े और दर्द में आराम बताया जाता है।
  • पत्तों को पीसकर गर्म कर सूजन या घाव पर लेप करने से सूजन कम होने की बात कही जाती है।

पानी की शुद्धता में सहजन की भूमिका

सहजन के बीजों का एक अनूठा उपयोग पानी को शुद्ध करने में भी बताया जाता है।

  • बीजों को पीसकर चूर्ण रूप में पानी में मिलाया जाता है।
  • यह प्राकृतिक क्लैरिफाइंग एजेंट की तरह काम कर पानी की गंदगी और कुछ हानिकारक जीवाणुओं को कम करने में मदद करता है।

कई जगह इसे घरेलू स्तर पर पेयजल को बेहतर बनाने के लिए परंपरागत रूप से अपनाया जाता है, हालांकि बड़े स्तर पर पीने के पानी के लिए वैज्ञानिक मानकों का पालन हमेशा ज़रूरी है।

त्वचा, सौंदर्य और कॉस्मेटिक उपयोग

सहजन के बीजों से निकाला गया तेल –

  • सूखी त्वचा के लिए प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र,
  • चेहरे की मृत त्वचा हटाने के लिए स्क्रब,
  • फेस मास्क और डे–क्रीम में सक्रिय घटक
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के रूप में उपयोग किया जाता है।

बताया जाता है कि:

  • सहजन का तेल एंटी–एजिंग केयर में मददगार है।
  • त्वचा की टोन, टेक्सचर और रंगत निखारने में सहयोग देता है।
  • धूप, धुआँ और प्रदूषण से होने वाले नुकसान से बचाव में उपयोगी माना जाता है।

सहजन के पेड़ की छाल का प्रयोग गोखरू, बिवाई, कील-मुहांसों जैसे त्वचा रोगों में भी लोक–चिकित्सा में किया जाता रहा है।

गर्भवती और बुजुर्गों के लिए

आपके टेक्स्ट में उल्लेख है कि सहजन के जूस या उसकी पत्ती/चटनी –

  • गर्भवती महिलाओं,
  • बुजुर्गों,
  • और रक्ताल्पता या आंखों के कुछ रोगों में लाभकारी मानी जाती है।

लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण सावधानी ज़रूरी है, गर्भावस्था और गंभीर बीमारियों में सहजन या किसी भी जड़ी–बूटी का सेवन हमेशा डॉक्टर या योग्य आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए।

सहजन के उपयोग में ज़रूरी सावधानियाँ (महत्वपूर्ण)

  • किसी भी गंभीर बीमारी (हाई BP, हार्ट डिज़ीज़, गर्भावस्था, मिर्गी, किडनी या लीवर रोग आदि) में स्व–उपचार नहीं करें।
  • अगर आप पहले से कोई दवा ले रहे हैं, तो सहजन को नियमित डाइट या औषधि की तरह लेने से पहले डॉक्टर से बात ज़रूर करें।
  • एलर्जी या असहजता महसूस हो तो सेवन रोक दें।

पोषण, औषधीय गुण, खेती, पशुपालन, पानी की शुद्धता, त्वचा और सौंदर्य — एक ही पेड़ इतने क्षेत्रों में मददगार हो, तो उसे कुदरत का चमत्कार कहना अतिशयोक्ति नहीं लगता।

संतुलित मात्रा में, समझदारी और सलाह के साथ यदि सहजन को हम अपनी थाली, रसोई और जीवन का हिस्सा बना लें, तो यह हमारे स्वास्थ्य, सुंदरता और जीवनशक्ति – तीनों को मज़बूती दे सकता है।

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