हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत पावन और शुभ महत्व है। हर महीने दो एकादशी तिथियां आती हैं—एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। इन्हीं में से एक है मोहिनी एकादशी, जिसे वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन मनाया जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप की आराधना की जाती है, जिसने अमृत वितरण के समय देवताओं को विजय दिलाई थी। यह दिन आत्मशुद्धि, पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए अद्वितीय माना जाता है।
मोहिनी एकादशी का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और वैदिक ऊर्जा के दृष्टिकोण से भी विशेष है। शास्त्रों में इसे हजार गौदान और सौ यज्ञों के समान पुण्यफल प्रदान करने वाला व्रत बताया गया है।
ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत और उपवास करने से शरीर, मन और आत्मा का शुद्धिकरण होता है। भूख कम लगने की वैज्ञानिक व्याख्या भी इस दिन की आध्यात्मिक उर्जा से जुड़ी है, जिससे साधक ध्यान और साधना में स्वयं को सहजता से समर्पित कर सकता है।
मोहिनी एकादशी व्रत कथा: मोहिनी रूप की दिव्यता
जब समुद्र मंथन हुआ, तब अमृत कलश को लेकर देवता और दैत्य आपस में भिड़ गए। असुरों ने बलपूर्वक अमृत प्राप्त कर लिया, जिससे देवताओं की हार निश्चित लगने लगी।
तब भगवान विष्णु ने मोहिनी नामक अत्यंत सुंदर स्त्री का रूप धारण किया। उनकी मोहक छवि देखकर असुर मोह में फंस गए और भगवान ने चतुराई से अमृत देवताओं को पिला दिया।
इसी मोहिनी रूप को स्मरण करते हुए मोहिनी एकादशी का व्रत किया जाता है, जिससे यह दिन न केवल विजयी बुद्धि का प्रतीक बनता है, बल्कि यह बताता है कि अधर्म पर धर्म की विजय सदा संभव है।
मोहिनी एकादशी 2025 की तिथि व पारण का समय
- एकादशी तिथि आरंभ: 7 मई 2025 को सुबह 10:19 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 8 मई 2025 को दोपहर 12:29 बजे
- व्रत मनाने की तिथि: 8 मई 2025 (गुरुवार)
- व्रत पारण मुहूर्त: 9 मई 2025 को सुबह 5:34 बजे से 8:16 बजे तक
पूजन विधि: मोहिनी एकादशी पर कैसे करें पूजा
- प्रात:काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- घर के मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें और पवित्र वातावरण बनाएं।
- चौकी पर पीले कपड़े बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- पंचामृत, फल, तुलसी दल, मिठाई और पीले पुष्पों से पूजा करें।
- दीपक और धूप जलाकर श्रीहरि की आरती करें।
- विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करें।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप 108 बार करें।
- दिनभर उपवास रखें और रात में भगवान के भजन-कीर्तन करें।
- अगले दिन पारण काल में व्रत का विधिपूर्वक समापन करें।
धार्मिक लाभ और जीवन पर प्रभाव
मोहिनी एकादशी का व्रत न केवल वर्तमान जीवन को सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि यह अगले जन्मों के लिए भी शुभ फलदायक माना जाता है।
इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग सुगम हो जाता है। यह आत्म संयम, आहार नियंत्रण और श्रद्धा के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
मोहिनी एकादशी हमें केवल एक धार्मिक दिन नहीं, बल्कि आत्मनियंत्रण, सच्ची श्रद्धा और प्रभु प्रेम की ओर बढ़ने का मार्ग प्रदान करती है। यह हमें सिखाती है कि कैसे धर्म के मार्ग पर चलते हुए कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी विजय प्राप्त की जा सकती है।
आइए, इस मोहिनी एकादशी पर हम सभी अपने अंदर की नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय पाकर आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर हों।



