|| माता-पिता का आशिर्वाद ||

माता-पिता का आशिर्वाद

माता-पिता का आशिर्वाद होता ठंडी छाँव,
और स्वर्ग इस दुनिया का है मात-पिता के पाँव ।

इस जहान में ये दोनों जिसको भी मिल जायें,
उसका बिगड़े कुछ नहीं बैरी भले हों गाँव ।

घनी घनेरी राहों को कर देगी रौशन,
मात-पिता की दुआ,चलता नहीं किसी का दाँव ।

जीवन उसका बन जाता हँस के समान,
दुनियां करती रह जाती है काँव, काँव,काँव ।

हो घना जंगल,सागर या फिर रेगिस्तान,
उनको भी मुश्किल लगे जो करना पड़े दुराव ।

दुश्मन की गोली चले या फिर पंजा शेर,
दे सकते वो नहीं है खरोंच, कैसे मारे घाव ।

लेखिका
श्रीमती प्रभा पांडेय जी
” पुरनम “

FOR MORE POETRY BY PRABHA JI VISIT माँ में तेरी सोनचिरैया

SUBSCRIBE OUR YOUTUBE CHANNEL

ALSO READ  || बेटी को ऐसे रखें | BETI KO AISE RAKHE ||

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here


Stay Connected

21,275FansLike
113FollowersFollow
1,540SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles