भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की जब उसने GSLV-F15 रॉकेट के माध्यम से NVS-02 नेविगेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह मिशन श्रीहरिकोटा से सुबह 6:23 बजे संपन्न हुआ और यह ISRO का 100वां लॉन्च था।
इस सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित किया गया, जिससे भारत के नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन (NavIC) प्रणाली को और अधिक मजबूती मिली। यह पहला प्रक्षेपण था जब ISRO के नए अध्यक्ष वी. नारायणन के नेतृत्व में कोई मिशन पूरा किया गया। उन्होंने 16 जनवरी 2025 को इस पद को संभाला था।
ISRO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर इस सफल लॉन्च की पुष्टि की। 50.9 मीटर लंबे GSLV-F15 रॉकेट ने स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज के साथ उड़ान भरी। इस रॉकेट ने NVS-02 नामक सैटेलाइट को अंतरिक्ष में स्थापित किया, जो NavIC प्रणाली की दूसरी पीढ़ी का दूसरा उपग्रह है। इस श्रृंखला का पहला उपग्रह NVS-01 मई 2023 में लॉन्च किया गया था।
NVS-02 के प्रमुख विशेषताएँ:
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (UR Rao Satellite Centre, Bengaluru) में निर्मित
- वजन: लगभग 2,250 किलोग्राम
- नेविगेशन पेलोड: L1, L5 और S बैंड में कार्य करने की क्षमता
- ट्राई-बैंड एंटीना और स्वदेशी रूबिडियम एटॉमिक फ्रिक्वेंसी स्टैंडर्ड से लैस
- भारत के साथ-साथ 1,500 किमी की सीमा तक नेविगेशन सेवाएं प्रदान करेगा
ISRO के अनुसार, NavIC प्रणाली भारत में स्थलीय, हवाई और समुद्री नेविगेशन, बेड़े प्रबंधन, सैटेलाइट ऑर्बिट निर्धारण, सटीक कृषि, IoT एप्लिकेशन और आपातकालीन सेवाओं जैसी जरूरतों को पूरा करेगी। दूसरी पीढ़ी के NavIC नक्षत्र में कुल पांच उपग्रह (NVS-01 से NVS-05) शामिल होंगे, जो भविष्य में भारत की नेविगेशन क्षमता को और मजबूत करेंगे।
इस मिशन की सफलता के बाद ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने डॉ. विक्रम साराभाई, एस. सोमनाथ और ए. एस. किरण कुमार जैसी महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और ISRO की शानदार यात्रा को सराहा। उन्होंने बताया कि अब तक ISRO ने कुल 548 उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं, जिनमें से 433 विदेशी उपग्रह भी शामिल हैं, जिनका संयुक्त भार 120 टन से अधिक है।
ISRO के आगामी मिशन (2025)
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की भविष्य की योजनाओं में NASA-ISRO सिंथेटिक एपर्चर रडार (NISAR) मिशन का लॉन्च शामिल है। इसके अलावा, गगनयान G1 मिशन के लिए भी तैयारियां जोरों पर हैं। वी. नारायणन ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों की भी सराहना की, जिससे ISRO की दीर्घकालिक योजनाओं को मजबूती मिल रही है।
ISRO के इन सफल अभियानों ने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष मानचित्र पर और अधिक प्रतिष्ठित स्थान दिलाया है। आने वाले वर्षों में NavIC और अन्य अंतरिक्ष मिशनों के माध्यम से भारत अंतरिक्ष अनुसंधान में एक नई ऊंचाई छूने के लिए तैयार है।