भारत अब स्वदेशी जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को घोषणा की कि अगले छह से आठ महीनों में भारत में स्वदेशी एआई मॉडल तैयार किए जाएंगे।
इस पहल की घोषणा उत्कर्ष ओडिशा कॉन्क्लेव में की गई, जहां मंत्री ने यह भी बताया कि DeepSeek-R1 AI मॉडल को भारतीय सर्वरों पर लागू किया गया है और विशेषज्ञ इस मॉडल की तकनीकी रिपोर्ट का मूल्यांकन कर रहे हैं।
इस घोषणा का समय भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विश्व आर्थिक मंच (WEF) की 55वीं वार्षिक बैठक के ठीक बाद आई है, जिसमें भारत की भागीदारी भी रही थी।
भारत के स्वदेशी एआई मॉडल की तैयारी
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, वैष्णव ने सम्मेलन के दौरान कई एआई-केंद्रित घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि भारत ने एआई अवसंरचना और कंप्यूटिंग क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 18,600 से अधिक हाई-एंड GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) हासिल कर लिए हैं। ये जीपीयू आने वाले महीनों में विकसित होने वाले स्वदेशी जनरेटिव एआई मॉडल की नींव बनेंगे।
मंत्री के अनुसार, “हम मानते हैं कि कम से कम छह बड़े डेवलपर्स छह से आठ महीनों में एआई मॉडल विकसित कर सकते हैं, जबकि कुछ चार से छह महीनों में भी इसे पूरा कर सकते हैं।”
भारत में एआई कंप्यूटिंग का विस्तार
आईटी मंत्री वैष्णव ने यह भी बताया कि कंप्यूटिंग सुविधाओं का विकास अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह एक मजबूत एआई इकोसिस्टम की रीढ़ मानी जाती है।
यह पहल “इंडिया एआई मिशन” के तहत शुरू की जा रही है और इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों को आवश्यक कंप्यूटिंग संसाधन प्रदान करना है।
उन्होंने बताया कि भारत के पास अब 18,600 से अधिक हाई-एंड जीपीयू उपलब्ध हैं, जिनमें शामिल हैं:
- 12,896 Nvidia H100 GPUs
- 1,480 Nvidia H200 GPUs
- 742 AMD MI325 और MI325X GPUs
पहले सरकार का लक्ष्य केवल 10,000 हाई-एंड एआई चिपसेट खरीदने का था, लेकिन अब यह संख्या उससे कहीं अधिक हो गई है।
वैष्णव ने उदाहरण देते हुए बताया कि “DeepSeek AI को मात्र 2,000 GPUs पर प्रशिक्षित किया गया था, जबकि ChatGPT को 25,000 GPUs की आवश्यकता थी। भारत के पास अब 18,000 हाई-एंड GPUs हैं, जिससे हमारी एआई महत्वाकांक्षाओं को मजबूती मिलेगी।”
DeepSeek-R1 मॉडल और भारत की AI सुरक्षा रणनीति
DeepSeek मॉडल पर बात करते हुए मंत्री ने बताया कि DeepSeek-R1 AI मॉडल को पहले ही भारत में लागू किया जा चुका है और विशेषज्ञ इसकी तकनीकी रिपोर्ट का मूल्यांकन कर रहे हैं।
इस रिपोर्ट से हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि इस मॉडल का भारतीय उपयोगकर्ताओं और एआई विकास पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
इसके अलावा, भारत एआई सुरक्षा और नियमों को लेकर भी बड़ा कदम उठा रहा है। वैष्णव ने घोषणा की कि भारत एआई सुरक्षा संस्थान की स्थापना करेगा, जो हब-एंड-स्पोक मॉडल पर आधारित होगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में एआई नियमन किसी एकल निकाय द्वारा नियंत्रित नहीं होगा, बल्कि विभिन्न संस्थान मिलकर सुरक्षा उपकरण और ढांचे विकसित करेंगे।
क्या भारतीय एआई मॉडल ओपन-सोर्स होंगे?
आईटी मंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि भारत में विकसित होने वाले स्वदेशी एआई मॉडल ओपन-सोर्स होंगे या नहीं। हालांकि, उन्होंने बताया कि ये सभी मॉडल सार्वजनिक रूप से सुलभ होंगे और उपयोगकर्ता इन्हें विभिन्न प्लेटफार्मों और API (एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) के माध्यम से उपयोग कर पाएंगे।
भारत की एआई क्रांति: क्या होगा प्रभाव?
भारत में एआई के इस विकास का कई क्षेत्रों में गहरा प्रभाव पड़ेगा, जिनमें शामिल हैं:
- शोध एवं शिक्षा: विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को बेहतर संसाधन उपलब्ध होंगे।
- स्टार्टअप इकोसिस्टम: भारतीय स्टार्टअप्स को स्वदेशी एआई तकनीक से लाभ मिलेगा।
- सरकारी सेवाएं: एआई का उपयोग सरकारी डेटा विश्लेषण और प्रशासनिक कार्यों में होगा।
- स्वास्थ्य सेवा: चिकित्सा अनुसंधान और निदान में एआई की भूमिका मजबूत होगी।
- साइबर सुरक्षा: एआई आधारित सुरक्षा तंत्र विकसित होंगे, जो साइबर अपराधों से निपटने में मदद करेंगे।
भारत में स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करने की यह योजना एक क्रांतिकारी कदम है, जो देश को एआई इनोवेशन में अग्रणी स्थान दिला सकता है। सरकार द्वारा उच्च-स्तरीय जीपीयू, डीपसीक-आर1 मॉडल और एआई सुरक्षा संस्थान जैसी पहलें इस क्षेत्र को मजबूती देंगी।
आने वाले छह से आठ महीनों में हमें इस परियोजना के प्रभावी परिणाम देखने को मिल सकते हैं, जो भारत को वैश्विक स्तर पर एक एआई सुपरपावर के रूप में स्थापित कर सकते हैं।



