भारत के टेक्नोलॉजी और स्पेस सेक्टर के लिए 19 अगस्त 2025 का दिन ऐतिहासिक बन गया। सेमिकॉन इंडिया 2025 के मंच पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश का पहला स्वदेशी 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर ‘विक्रम (VIKRAM3201)’ प्रदर्शित किया।
इसे इसरो (ISRO) ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विकसित किया है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस चिप और चार अन्य टेस्ट चिप्स का प्रदर्शन किया गया।
यह उपलब्धि भारत के सेमीकंडक्टर मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, क्योंकि इससे न सिर्फ भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी, बल्कि स्पेस रिसर्च और हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भी वैश्विक पहचान को और बल मिलेगा।
First ‘Made in Bharat’ Chips! 🇮🇳 pic.twitter.com/QYFGA4HFLG
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) September 2, 2025
विक्रम माइक्रोप्रोसेसर की विशेषताएँ
- 32-बिट आर्किटेक्चर (VIKRAM3201): यह चिप पूरी तरह से स्वदेशी है और लॉन्च वाहनों के लिए डिज़ाइन की गई है।
- अत्यधिक तापमान सहनशीलता: -55°C से 125°C तक काम करने की क्षमता। यानी यह अंतरिक्ष के कठोर वातावरण में भी पूरी तरह सक्षम रहेगा।
- बैकवर्ड कम्पैटिबिलिटी: यह पुराने VIKRAM1601 माइक्रोप्रोसेसर से भी संगत है, जिसका प्रयोग इसरो 2009 से कर रहा है।
- एडा भाषा का समर्थन (Ada Language): अंतरिक्ष यानों, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और सैटेलाइट सिस्टम्स के लिए यह भाषा बेहद विश्वसनीय मानी जाती है।
- फ्लोटिंग पॉइंट कम्प्यूटेशन: जटिल गणनाओं, 3D ग्राफिक्स रेंडरिंग और अंतरिक्ष यान की ट्रेजेक्टरी (trajectory) निकालने में सहायक।
- ओपन-सोर्स टूल्स संगतता: इसे ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर टूलसेट्स, प्रॉपराइटरी सिम्युलेटर और IDE के साथ विकसित किया गया है।
यह माइक्रोप्रोसेसर इसरो के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) और सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी (SCL) ने मिलकर तैयार किया है।
‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM)’ के तहत भारत 5 बड़े सेमीकंडक्टर यूनिट्स का निर्माण कर रहा है। इनमें से एक की पायलट लाइन पूरी हो चुकी है और शेष तेजी से निर्माणाधीन हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा:
“सिर्फ 3.5 वर्षों में दुनिया भारत की ओर विश्वास से देख रही है। आज पहला Made in India चिप प्रधानमंत्री जी को प्रस्तुत करना गौरव का क्षण है।”
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विक्रम माइक्रोप्रोसेसर क्यों है महत्वपूर्ण?
- स्पेस मिशन सुरक्षा: कठोर पर्यावरण में भी नेविगेशन और कंट्रोल सिस्टम को सुनिश्चित करेगा।
- आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम: विदेशी प्रोसेसरों पर निर्भरता कम होगी।
- भविष्य की तकनीक: यह चिप आने वाले समय में सैटेलाइट, डिफेंस और AI-आधारित सिस्टम्स में भी काम आ सकती है।
- वैश्विक पहचान: भारत अब केवल स्पेस टेक्नोलॉजी में नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर निर्माण में भी आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि आने वाले महीनों में दो अन्य फैब्रिकेशन प्लांट्स भी अपनी चिप्स रिलीज़ करेंगे।
यह साफ संकेत है कि भारत अगले दशक में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग का हब बनने की ओर बढ़ रहा है।



