एक नई वैज्ञानिक रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि जब कोई व्यक्ति शोरगुल वाले माहौल में किसी विशेष ध्वनि पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करता है, तो उसके कान की छोटी मांसपेशियाँ सक्रिय हो जाती हैं। ये मांसपेशियाँ जो कभी पूर्वज प्रजातियों में कानों की गतिविधि को नियंत्रित करने में मदद करती थीं, आधुनिक मानव में अब ज्यादा उपयोगी नहीं हैं। लेकिन, इनकी सक्रियता यह संकेत देती है कि मानव सुनने की प्रणाली में अब भी विकासवादी अवशेष (evolutionary remnant) मौजूद हैं।
रिसर्च में क्या सामने आया?
यह अध्ययन “Frontiers in Neuroscience” जर्नल में प्रकाशित हुआ है और इसे जर्मनी की सारलैंड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने किया है। इस रिसर्च के दौरान सामान्य सुनने की क्षमता वाले प्रतिभागियों पर प्रयोग किए गए।
- कैसे किया गया प्रयोग?
- प्रतिभागियों को अलग-अलग दिशाओं से आती ध्वनियों के मिश्रण में एक विशेष ध्वनि पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया।
- इस दौरान, उनके कान की मांसपेशियों की गतिविधि को इलेक्ट्रोड्स की मदद से रिकॉर्ड किया गया।
- क्या पता चला?
- सुपीरियर ऑरिकुलर मांसपेशियाँ (Superior Auricular Muscles), जो कानों के ऊपर स्थित होती हैं, तब ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं जब ध्वनियों के बीच भेद करना मुश्किल हो जाता है।
- पोस्टीरियर ऑरिकुलर मांसपेशियाँ (Posterior Auricular Muscles), जो कान के पीछे स्थित होती हैं, तब ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं जब ध्वनियाँ पीछे से आती हैं।
- वैज्ञानिकों का मानना है कि यह गतिविधि पूर्वज मानवों के लिए उपयोगी थी, जिससे वे अपने सीधी दृष्टि से बाहर की आवाजों को पहचानने में सक्षम हो पाते थे।
क्या यह खोज श्रवण यंत्र (Hearing Aid) तकनीक को सुधार सकती है?
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिसौरी के वैज्ञानिक स्टीवन हैकले ने Live Science को बताया कि इस शोध से आने वाले समय में हियरिंग एड तकनीक को और बेहतर बनाया जा सकता है।
- यदि हियरिंग एड उपकरण कान की इन छोटी मांसपेशियों की गतिविधि को ट्रैक कर सकें,
- तो वे स्वचालित रूप से उन ध्वनियों को तेज कर सकते हैं, जिन पर व्यक्ति ध्यान केंद्रित कर रहा है।
विज्ञानियों के अलग-अलग मत
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस अध्ययन के निष्कर्ष पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं।
- यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के शोधकर्ता मैथ्यू विन का कहना है कि कान की मांसपेशियों की यह गतिविधि सुनने के प्रयास का संकेत नहीं भी हो सकती।
- यह सिर्फ सतर्कता (alertness) की स्थिति को दर्शा सकती है, न कि व्यक्ति की सचेत रूप से सुनने की कोशिश को।
इस रिसर्च से यह स्पष्ट होता है कि कान की छोटी और कम उपयोग होने वाली मांसपेशियाँ अब भी हमारी सुनने की क्षमता से जुड़ी हुई हैं। वैज्ञानिक इस खोज को हियरिंग एड्स और श्रवण क्षमता बढ़ाने वाली तकनीकों के लिए क्रांतिकारी खोज मान रहे हैं। आने वाले वर्षों में इस शोध के आधार पर नई AI-पावर्ड स्मार्ट हियरिंग एड्स विकसित किए जा सकते हैं, जो व्यक्ति की सुनने की क्षमता को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं।



