उत्तर सागर के नीचे करीब 1 किलोमीटर की गहराई में दबे हुए भू-आकृतियों के अवशेष मिले हैं, जो लगभग 10 लाख साल पुरानी बर्फ की विशाल चादर के कारण बने थे। ये अवशेष मध्य-प्लीस्टोसीन संक्रमण (Mid-Pleistocene Transition, MPT) के दौरान बनी संरचनाओं को दर्शाते हैं। हाल ही में किए गए उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग अध्ययनों ने इन भू-आकृतियों को उजागर किया है, जो यह बताने में मदद कर रहे हैं कि इस समय जलवायु में बदलावों के कारण हिमनद किस प्रकार से विकसित और विलुप्त हुए।
उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग से हुए खुलासे
वैज्ञानिकों ने Science Advances पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया कि इन संरचनाओं को ध्वनि तरंग डेटा (sound wave data) की मदद से खोजा गया।
- यह विशाल बर्फ की चादर वर्तमान नॉर्वे से ब्रिटिश द्वीपों तक फैली हुई थी।
- इस खोज ने यह धारणा खारिज कर दी है कि क्षेत्र में कई छोटी बर्फ की चादरों ने भू-संरचना को आकार दिया।
- न्यूकैसल विश्वविद्यालय की वरिष्ठ व्याख्याता, क्रिस्टीन बैचलर ने बताया कि ये भू-आकृतियां बर्फ की चादर के आगे बढ़ने और पीछे हटने की प्रक्रिया को दर्शाती हैं।
मुख्य भू-आकृतियों के पैटर्न
बर्फ की चादरें अपनी गति के दौरान तलछट (sediment) को गढ़ती हैं और विशिष्ट प्रकार की क्षरण (erosional) और निक्षेपण (depositional) आकृतियां बनाती हैं।
- बर्फ के बढ़ने के दौरान बनी आकृतियां:
- बर्फ के प्रवाह की दिशा के अनुरूप संरचनाएं पाई गईं, जिन्हें streamlined features कहा जाता है।
- बर्फ के पीछे हटने के दौरान बनी आकृतियां:
- Crevasse-squeeze ridges जैसे पैटर्न मिले।
- ये तब बनते हैं जब बर्फ के आधार में मौजूद दरारों में नरम तलछट धकेली जाती है और पानी के कारण बर्फ की चादर उठने लगती है।
जलवायु परिवर्तन शोध के लिए महत्त्व
मध्य-प्लीस्टोसीन संक्रमण पृथ्वी के हिमनद इतिहास का एक महत्वपूर्ण चरण था।
- इस अवधि में लंबे और तीव्र हिमयुग देखे गए।
- यह अध्ययन यह समझने में मदद करता है कि बर्फ की चादरें जलवायु परिवर्तनों के प्रति कैसी प्रतिक्रिया देती हैं।
- वैज्ञानिक इन निष्कर्षों का उपयोग ऐतिहासिक हिमनद गतिविधियों के मॉडल बनाने और वर्तमान जलवायु प्रणाली पर इनके प्रभाव को समझने में करेंगे।
नेचर के बारे में नई दृष्टि
यह खोज न केवल प्राचीन बर्फ की चादरों की गतिशीलता को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि पृथ्वी के जलवायु तंत्र में छोटे-छोटे बदलाव कैसे बड़े पैमाने पर प्रभाव डाल सकते हैं।



