इटली के वुल्कानो द्वीप के उथले जल में वैज्ञानिकों ने “चोंकस” (Chonkus) नामक एक उत्परिवर्तित सायनोबैक्टीरिया की खोज की है, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने में सहायक हो सकता है। यह सूक्ष्मजीव वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने में बेहद प्रभावी है।
अन्य सायनोबैक्टीरिया की तुलना में इसका आकार बड़ा है, यह अधिक मात्रा में कार्बन संग्रहीत करता है और तेजी से डूब जाता है, जिससे अवशोषित कार्बन को समुद्र की गहराइयों तक स्थानांतरित करने की क्षमता रखता है।
इस गुण के कारण, यह कार्बन भंडारण की प्रक्रिया को बढ़ाने और वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को कम करने में मदद कर सकता है।
“चोंकस” से जुड़े प्रमुख निष्कर्ष
Applied and Environmental Microbiology में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, यह जीवाणु ज्वालामुखीय गैसों से समृद्ध जल में विकसित हुआ, जहां प्राकृतिक रूप से कार्बन डाइऑक्साइड का रिसाव होता है।
यह Synechococcus elongatus नामक सायनोबैक्टीरिया का उत्परिवर्तित रूप है, जो अत्यंत तीव्र गति से प्रकाश संश्लेषण करता है।
- वैज्ञानिकों ने पाया कि “चोंकस” बड़ी उपनिवेशों (colonies) में विकसित होता है और इसमें घने सफेद कण (granules) होते हैं, जो कार्बन को संग्रहित करने में मदद करते हैं।
- अन्य सायनोबैक्टीरिया की तुलना में यह अधिक भारी होता है। परीक्षणों के दौरान यह देखा गया कि जब इसे ट्यूबों में रखा गया, तो यह तेजी से तल में बैठ गया, जिससे एक घनी हरी परत बनी।
- इसकी तेजी से डूबने की प्रवृत्ति इसे कार्बन पृथक्करण (carbon sequestration) के लिए एक मजबूत उम्मीदवार बनाती है, क्योंकि यह अन्य सूक्ष्मजीवों की तुलना में वायुमंडलीय कार्बन को अधिक प्रभावी ढंग से समुद्र की गहराई में स्थानांतरित कर सकता है।
कार्बन पृथक्करण में संभावित भूमिका
Science News Explore की रिपोर्ट के अनुसार, इस खोज से संकेत मिलता है कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में अधिक कार्बन डाइऑक्साइड रिसाव वाले स्थानों में ऐसे अन्य सूक्ष्मजीव भी मौजूद हो सकते हैं।
- “चोंकस” वातावरण से कार्बन अवशोषित करने के बाद तेजी से समुद्र की गहराइयों में डूब जाता है, जिससे यह कार्बन को स्थायी रूप से समुद्री तलछट में संग्रहीत करने का एक प्रभावी तरीका प्रदान कर सकता है।
- वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे अधिक जीवाणुओं की खोज से जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
- यह खोज दर्शाती है कि सूक्ष्म जीवाणु भी वैश्विक स्तर पर कार्बन डाइऑक्साइड को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आने वाले समय में वैज्ञानिक अन्य ज्वालामुखीय क्षेत्रों और समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों में शोध करके ऐसे और अधिक प्रभावी सूक्ष्मजीवों की खोज कर सकते हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में मदद मिल सके।



