आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने उत्तरी लाइट्स (Auroras) के अध्ययन में एक नई दिशा प्रदान की है। इस तकनीक की मदद से वैज्ञानिक अब 700 मिलियन से अधिक चित्रों को वर्गीकृत और अध्ययन कर पा रहे हैं। इस शोध का मुख्य उद्देश्य भू-चुंबकीय तूफानों (geomagnetic storms) की भविष्यवाणी को बेहतर बनाना है, जो पृथ्वी पर संचार और सुरक्षा प्रणालियों को बाधित कर सकते हैं।
नासा के THEMIS डेटा की भूमिका
इस शोध के लिए डेटा नासा के THEMIS उपग्रहों से लिया गया, जो हर तीन सेकंड में ऑरोरा की तस्वीरें खींचते हैं। इन चित्रों को उत्तरी अमेरिका में 23 निगरानी स्टेशनों के माध्यम से 2008 से 2022 तक एकत्र किया गया।
डेटा वर्गीकरण और तकनीक
Phys.org के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू हैम्पशायर के शोधकर्ताओं ने एक मशीन लर्निंग एल्गोरिदम विकसित किया है। इस तकनीक ने THEMIS डेटा को छह श्रेणियों में वर्गीकृत किया:
- आर्क (Arc)
- डिफ्यूज (Diffuse)
- डिस्क्रीट (Discrete)
- क्लाउडी (Cloudy)
- मून (Moon)
- क्लियर/नो ऑरोरा (Clear/No Aurora)
इस वर्गीकरण ने डेटा के विशाल संग्रह को व्यवस्थित और उपयोगी बना दिया है, जिससे वैज्ञानिक अब आसानी से विश्लेषण कर सकते हैं।
मग्नेटोस्फीयर पर शोध का विस्तार
जेरेमिया जॉनसन, यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू हैम्पशायर के एसोसिएट प्रोफेसर, ने बताया कि यह विशाल डेटा हमारे ग्रह की सुरक्षात्मक चुंबकीय परत (Magnetosphere) के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। पहले इस डेटा की विशालता के कारण इसे उपयोग में लाना कठिन था। लेकिन AI आधारित इस तकनीक ने इसे सरल और तेज़ बना दिया है।
भविष्य के शोध में उपयोगिता
यह वर्गीकृत डेटाबेस अब औरोरा की गतिशीलता (Auroral Dynamics) पर शोध के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगा। यह डेटा अंतरिक्ष मौसम घटनाओं (Space Weather Events) और उनके पृथ्वी पर प्रभावों को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
वैज्ञानिकों का सहयोग और तकनीकी योगदान
इस परियोजना में यूनिवर्सिटी ऑफ अलास्का-फेयरबैंक्स और नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के वैज्ञानिकों ने भी योगदान दिया। AI का उपयोग यह दिखाता है कि कैसे आधुनिक तकनीक अंतरिक्ष विज्ञान में डेटा से जुड़े बड़े प्रश्नों को हल कर सकती है।



