भारत सरकार ने आधार प्रमाणीकरण सेवा को सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में विस्तारित करने की घोषणा की है। यह विस्तार इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा हाल ही में किए गए संशोधन का हिस्सा है। सरकार का मानना है कि यह बदलाव पारदर्शिता, समावेशन और नवाचार को बढ़ावा देगा, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।
क्या है आधार प्रमाणीकरण सेवा का यह नया संशोधन?
इस सेवा का विस्तार आधार प्रमाणीकरण फॉर गुड गवर्नेंस (सोशल वेलफेयर, इनोवेशन, नॉलेज) अमेंडमेंट रूल्स, 2025 के तहत किया गया है। इसे आधार (लक्षित वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं की डिलीवरी) अधिनियम, 2016 के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है।
सरकार ने इस बदलाव को eGazette अधिसूचना और सोशल मीडिया पोस्ट (X, पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से घोषित किया। इस संशोधन के तहत अब सरकारी और निजी दोनों संस्थाएं आधार प्रमाणीकरण सेवा का उपयोग कर सकती हैं ताकि वे अपने उपयोगकर्ताओं और ग्राहकों की पहचान सत्यापित कर सकें।
MeitY ने अपने बयान में कहा कि “यह संशोधन सेवा प्रदाताओं और सेवा प्राप्तकर्ताओं, दोनों के लिए सुरक्षित लेनदेन को सुगम बनाएगा।” इससे सार्वजनिक कल्याण, नवाचार और डिजिटल ज्ञान के प्रसार को बढ़ावा मिलेगा।
किन क्षेत्रों में मिलेगा आधार प्रमाणीकरण सेवा का लाभ?
इस संशोधन से ई-कॉमर्स, यात्रा, पर्यटन, आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी), स्वास्थ्य सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में आधार प्रमाणीकरण का उपयोग बढ़ेगा।
कैसे मिलेगा इस सेवा का लाभ?
यदि कोई सरकारी या गैर-सरकारी संस्थान आधार प्रमाणीकरण सेवा का उपयोग करना चाहता है, तो उसे पहले एक आवेदन संबंधित मंत्रालय या राज्य सरकार के विभाग को जमा करना होगा।
इस प्रक्रिया के अंतर्गत:
- संस्था को अपनी आवश्यकताओं की जानकारी आवेदन पत्र में देनी होगी।
- इस आवेदन की समीक्षा यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) करेगी।
- UIDAI की सिफारिश पर MeitY अंतिम स्वीकृति देगा।
आधार प्रमाणीकरण सेवा पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
2018 में सुप्रीम कोर्ट ने निजी संस्थाओं द्वारा आधार डेटा की मांग करने पर रोक लगा दी थी। 2020 में सरकार ने एक कानून लाया था, जिसने आधार प्रमाणीकरण तक निजी कंपनियों की पहुंच को सीमित कर दिया था। हालांकि, इस संशोधन के साथ अब कुछ शर्तों के तहत निजी कंपनियों को भी आधार प्रमाणीकरण सेवा का उपयोग करने की अनुमति दी गई है।
निष्कर्ष
यह संशोधन भारत के डिजिटल इकोसिस्टम को और मजबूत करेगा। आधार प्रमाणीकरण के उपयोग से सरकारी योजनाओं की डिलीवरी में पारदर्शिता आएगी और निजी क्षेत्र में डिजिटल लेनदेन अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय होंगे। इस कदम से भारत में डिजिटल नवाचार और सामाजिक समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा।