सर्दियों का मौसम आते ही जहां एक ओर ठंडक और आराम का एहसास होता है, वहीं दूसरी ओर यह मौसम दिल की सेहत के लिए सबसे ज्यादा जोखिम भरा भी माना जाता है। हर साल सर्दियों में हार्ट अटैक के मामलों में अचानक बढ़ोतरी देखी जाती है।
विशेष रूप से सुबह के समय दिल से जुड़ी गंभीर घटनाएं अधिक सामने आती हैं। यह महज संयोग नहीं, बल्कि इसके पीछे ठंड से जुड़े कई वैज्ञानिक और शारीरिक कारण होते हैं।
यूरोपियन जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे से पीड़ित लोगों में सर्दियों के दौरान हार्ट अटैक का खतरा 30 गुना तक बढ़ सकता है।
आइए विस्तार से समझते हैं कि सर्दी में दिल पर क्या असर पड़ता है, जोखिम किन लोगों को ज्यादा है और किन उपायों से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सर्दी में शरीर पर क्या बदलाव होते हैं
ठंड का सीधा असर हमारे शरीर की ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम पर पड़ता है। जैसे ही तापमान गिरता है, शरीर अपने आंतरिक तापमान को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करता है। इसी प्रक्रिया में कई ऐसे बदलाव होते हैं, जो दिल के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
ब्लड वैसल्स का सिकुड़ना
ठंड में शरीर की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने लगती हैं। इससे खून का प्रवाह बाधित होता है और दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा दबाव लगाना पड़ता है। यही वजह है कि सर्दियों में ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है।
ब्लड का गाढ़ा होना
एक्सपर्ट्स के अनुसार ठंड के मौसम में खून अपेक्षाकृत गाढ़ा हो जाता है। गाढ़ा खून आसानी से थक्का बना सकता है, और यही थक्का जब हृदय की धमनियों में रुकावट पैदा करता है, तो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
हार्मोनल बदलाव
कम तापमान की वजह से शरीर में तनाव हार्मोन जैसे एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। ये हार्मोन दिल की धड़कन तेज करते हैं और ब्लड प्रेशर को और ऊपर ले जाते हैं।
सुबह के समय हार्ट अटैक का खतरा क्यों ज्यादा होता है
हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में सुबह का समय सबसे संवेदनशील होता है। मनिपाल हॉस्पिटल के हृदय विशेषज्ञ डॉ. अंशुल कुमार गुप्ता बताते हैं कि सुबह के समय ठंड अपने चरम पर होती है। इस दौरान शरीर अचानक गर्म बिस्तर से ठंडे वातावरण में आता है, जिससे दिल और ब्लड वैसल्स पर अचानक दबाव पड़ता है।
सुबह के समय:
- ब्लड प्रेशर स्वाभाविक रूप से अधिक होता है
- ब्लड वैसल्स ज्यादा सिकुड़ी होती हैं
- दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है
इसी कारण सुबह 6–7 बजे की ठंड में की गई वॉक या एक्सरसाइज हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा सकती है, खासकर बुजुर्गों और पहले से हृदय रोग से पीड़ित लोगों में।
किन लोगों को सर्दियों में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है
कुछ वर्ग ऐसे हैं जिनमें सर्दी के मौसम में हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है:
- हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
- मोटापे से ग्रस्त लोग
- डायबिटीज के रोगी
- धूम्रपान करने वाले
- पहले हार्ट अटैक या हार्ट सर्जरी करा चुके लोग
- बुजुर्ग व्यक्ति
इन लोगों को सर्दियों में अपनी दिनचर्या और खानपान को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
प्रदूषण और ठंड का घातक संयोजन
आज के समय में एक और बड़ा खतरा है सर्दी और प्रदूषण का मेल। सर्दियों में स्मॉग की समस्या बढ़ जाती है, जो फेफड़ों और दिल दोनों पर अतिरिक्त दबाव डालती है।
हृदय और फेफड़े आपस में सीधे जुड़े होते हैं। जब प्रदूषित हवा फेफड़ों पर असर डालती है, तो उसका सीधा प्रभाव दिल पर भी पड़ता है।
विशेष रूप से:
- अस्थमा के मरीज
- क्रोनिक ब्रोंकाइटिस के रोगी
- धूम्रपान करने वाले
- संवेदनशील हृदय रोगी
इन लोगों के लिए सर्दियों की सुबह की सैर और खुले में व्यायाम और भी खतरनाक हो सकता है।
सर्दी में हार्ट अटैक से बचाव के प्रभावी उपाय
सुबह की वॉक का समय बदलें
अगर आप सर्दियों में वॉक करना चाहते हैं, तो सुबह 9 बजे के बाद का समय चुनें, जब धूप निकल आए और तापमान थोड़ा सामान्य हो जाए।
नमक का सेवन सीमित करें
नमक ज्यादा लेने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सर्दियों में नमक का सेवन नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।
धूप में समय बिताएं
धूप में बैठने से शरीर गर्म रहता है और सिकुड़ी हुई ब्लड वैसल्स धीरे-धीरे सामान्य होने लगती हैं। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।
नियमित लेकिन संतुलित एक्सरसाइज
हल्की-फुल्की एक्सरसाइज और वॉक शरीर को न सिर्फ फिट रखती है, बल्कि उसे अंदर से वार्म भी रखती है। ध्यान रखें कि अत्यधिक ठंड में जोरदार व्यायाम न करें।
डाइट पर रखें विशेष नियंत्रण
सर्दियों में तला-भुना और मीठा खाने की इच्छा बढ़ जाती है। लेकिन ऐसी डाइट:
- कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती है
- धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा बढ़ाती है
संतुलित आहार लें, जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और हेल्दी फैट शामिल हों।
खुद से दवा न लें
सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर या अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखें तो स्व-उपचार से बचें और तुरंत योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।
सर्दियों में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ना कोई मिथक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से सिद्ध तथ्य है। ठंड, प्रदूषण, ब्लड प्रेशर में वृद्धि और गलत दिनचर्या मिलकर दिल पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं।
थोड़ी सी समझदारी, सही समय पर एक्सरसाइज, संतुलित आहार और डॉक्टर की सलाह से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
दिल की सेहत साल भर की मेहनत से बनती है, लेकिन सर्दियों में थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।