ललिता षष्ठी व्रत 2025 : संतान सुख और सौभाग्य पाने का दिव्य अवसर | जानिए पूरी जानकारी | 2YoDo विशेष

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को ललिता षष्ठी व्रत मनाया जाता है। यह व्रत शक्तिस्वरूपा देवी ललिता को समर्पित है और स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इसके महत्व का वर्णन किया है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से स्त्रियों को सौभाग्य, संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसे संतान षष्ठी व्रत भी कहा जाता है।

ललिता षष्ठी व्रत पूजन विधि

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ईशान कोण (पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके) पूजन स्थल पर भगवान शालिग्राम, कार्तिकेय, माता गौरी और शिवजी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • पूजन सामग्री : तांबे का लोटा, नारियल, कुमकुम, अक्षत, हल्दी, चंदन, अबीर, गुलाल, दीपक, घी, इत्र, पुष्प, फल, मेवा, मौली आदि।
  • पूजन के समय “ॐ ह्रीं षष्ठी देव्यै स्वाहा” मंत्र का जाप करें।
  • माता ललिता से सुहाग, संतान सुख और परिवार की रक्षा का आशीर्वाद मांगें।

ललिता षष्ठी व्रत का महत्व

  • यह व्रत विशेषकर पुत्रवती स्त्रियों द्वारा अपने पति की दीर्घायु और संतान की उन्नति के लिए रखा जाता है।
  • मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से संतान की पीड़ा और रोग समाप्त होते हैं।
  • इस दिन मेवा-मिष्ठान्न, खीर और मालपुआ का प्रसाद बांटा जाता है।
  • कई स्थानों पर विष्णु, शिव-पार्वती और स्कंदमाता की पूजा भी की जाती है।
  • इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर माता ललिता देवी की कृपा से सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।
ALSO READ  मंदिर के बाहर बोला जाने वाला छोटा-सा मंत्र — जो तुरंत जोड़ देता है भगवान से | जानिए पूरी जानकारी | 2YoDo विशेष

ललिता षष्ठी व्रत से जुड़े लाभ

  1. योग्य संतान की प्राप्ति होती है।
  2. पति-पत्नी के बीच सुखमय दांपत्य जीवन का वरदान मिलता है।
  3. परिवार में सौभाग्य और समृद्धि बनी रहती है।
  4. संतान के जीवन से कष्ट और रोगों का निवारण होता है।
  5. भक्त का जीवन सदैव शांति और शक्ति से परिपूर्ण रहता है।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here


Stay Connected

21,219FansLike
112FollowersFollow
1,600SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles