एक नई शोध में मानव बाहरी कान और प्राचीन मछलियों के गलफड़ों के बीच एक अद्भुत संबंध को उजागर किया गया है। जीन-एडिटिंग के प्रयोगों से पता चला है कि मछलियों के गलफड़ों में मौजूद उपास्थि (cartilage) ने लाखों साल पहले विकासक्रम में स्थानांतरित होकर स्तनधारियों में बाहरी कान का रूप लिया।
यह खोज दर्शाती है कि मानव कान में मौजूद लचीली उपास्थि (elastic cartilage) का उद्गम समुद्री अकशेरुकी जीवों जैसे घोड़े की नाल के केंकड़ों (horseshoe crabs) से जुड़ा हो सकता है।
शोध के मुख्य निष्कर्ष
Nature पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के स्टेम सेल जीव विज्ञान और पुनर्योजी चिकित्सा के प्रोफेसर गेज क्रंप के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने मानव बाहरी कान की उत्पत्ति की जांच की।
- लचीली उपास्थि: मानव बाहरी कान की प्रमुख संरचना, जो अन्य उपास्थियों की तुलना में अधिक लचीली होती है, केवल स्तनधारियों में पाई जाती है।
- शोध में पाया गया कि यह प्रकार की उपास्थि आधुनिक बोन-फिश जैसे ज़ेब्रा मछली और अटलांटिक सैल्मन की गलफड़ों में भी मौजूद है।
जीन-एडिटिंग के प्रयोगों से मिली जानकारी
Live Science के अनुसार, शोधकर्ताओं ने मानव बाहरी कान के विकास से जुड़े जीन नियंत्रण तत्वों (genetic enhancers) को ज़ेब्रा मछली के जीनोम में डाला। यह तत्व गलफड़ों में सक्रिय हो गए, जिससे दोनों संरचनाओं के बीच एक जैविक संबंध स्थापित हुआ।
- जब उल्टा प्रयोग किया गया और ज़ेब्रा मछली के जीन नियंत्रण तत्वों को चूहों के जीनोम में डाला गया, तो चूहों के बाहरी कानों में गतिविधि देखी गई।
- इसने मछलियों के गलफड़ों और स्तनधारियों के कानों के बीच एक गहरा विकासात्मक संबंध सिद्ध किया।
प्राचीन समुद्री संबंध और विकासक्रम
शोध में यह भी दिखाया गया कि सरीसृपों और उभयचरों ने भी मछलियों से गलफड़-आधारित संरचनाओं को विरासत में पाया।
- 315 मिलियन साल पहले: ग्रीन एनोले छिपकली के अध्ययन से संकेत मिले कि इस समय तक गलफड़ों से कान की नलियों तक लचीली उपास्थि का स्थानांतरण शुरू हो चुका था।
- 400 मिलियन साल पहले: घोड़े की नाल के केंकड़ों में मौजूद जीन नियंत्रण तत्वों ने मछली के गलफड़ों में सक्रियता दिखाई, जो इस विकासक्रम को और भी गहरे समुद्री इतिहास से जोड़ता है।
निष्कर्ष और महत्व
यह शोध दर्शाता है कि कैसे प्राचीन जीवों की संरचनाओं का पुनः उपयोग करके स्तनधारियों ने बाहरी कान जैसे अद्वितीय अंग विकसित किए। यह अन्वेषण न केवल जैव विकास की गहराई को समझने में मदद करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे प्राकृतिक चयन ने जीवों को अनुकूलित किया।



